भारत सरकार ने राष्ट्रीय समिति की सिफारिशों को मानते हुए स्कूल व कॉलेजों में व्यापक लैंगिक शिक्षा शुरू करने की तैयारी की घोषणा की। यह कदम किशोर गर्भधारण और पोको एक्ट के तहत आपराधिककरण को रोकने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • सरकार ने 26‑सदस्यीय राष्ट्रीय समिति की रिपोर्ट को स्वीकार किया।
  • NCERT नई व्यापक लैंगिक शिक्षा पाठ्यक्रम तैयार करेगा।
  • सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी के बाद सभी स्कूलों में कार्यान्वयन होगा।

नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्तर पर लैंगिक शिक्षा को लेकर चल रही बहस को अब एक नया मोड़ मिला है। सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष इस बात की पुष्टि की कि वह "व्यापक लैंगिक शिक्षा" (Comprehensive Sex Education) को स्कूल‑कॉलेज पाठ्यक्रम में शामिल करने के लिए तैयार है, जैसा कि एक विशेषज्ञ समिति ने सिफारिश की थी।

पृष्ठभूमि और समिति की भूमिका

वर्षों से भारत में यौन शिक्षा को सामाजिक रूढ़ियों और राजनीतिक प्रतिरोध का सामना करना पड़ा है। 2018 में पोको एक्ट (Protection of Children from Sexual Offences Act) के तहत किशोर प्रेमियों को आपराधिक बनाना एक प्रमुख चिंता बन गया था। इस समस्या को हल करने के लिए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने 26‑सदस्यीय राष्ट्रीय विशेषज्ञ समिति गठित की, जिसका नेतृत्व अतिरिक्त सचिव ऐश्वarya Bhati ने किया। इस समिति में टीआईएस, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों और NCPCR एवं NLSA के प्रतिनिधि शामिल थे।

सिफारिशें और पाठ्यक्रम दिशा‑निर्देश

समिति ने सुझाव दिया कि "बच्चों के यौन शोषण" को कोर पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए तथा बुनियादी सुरक्षा, शरीर के अंगों की पहचान, स्वच्छता और "सुरक्षित‑असुरक्षित स्पर्श" जैसे विषय प्रारंभिक स्तर से ही पढ़ाए जाएँ। इसके अलावा, प्राथमिक विद्यालय से ही एक विशेषज्ञ शिक्षक को नियुक्त कर, सप्ताह में दो बार 15‑20 मिनट की अनिवार्य कक्षाएँ आयोजित की जाएँ। माता‑पिता, अभिभावकों और शिक्षकों के लिए विशेष जागरूकता सत्र भी अनिवार्य करने का प्रस्ताव रखा गया।

NCERT की जिम्मेदारी और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020

समिति ने NCERT (National Council of Educational Research and Training) को नया पाठ्यक्रम तैयार करने का आदेश दिया। यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के समग्र विकास, आलोचनात्मक सोच और जीवन कौशल निर्माण के सिद्धांतों के साथ संरेखित है। नई पाठ्यक्रम में किशोरों को यौन स्वास्थ्य, सहमति, लैंगिक पहचान और जोखिम‑मुक्त व्यवहार के बारे में वैज्ञानिक तथ्य प्रदान किए जाएंगे।

सुप्रीम कोर्ट की भूमिका और भविष्य की दिशा

सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर विशेष पैनल स्थापित कर कई सुनवाई कीं, जिसमें वरिष्ठ वकीलों ने अमिकस क्यूरी के रूप में रिपोर्ट की वैधता पर प्रकाश डाला। कोर्ट ने अब इस रिपोर्ट की औपचारिक स्वीकृति के बाद आदेश जारी करने का आश्वासन दिया है, जिससे शैक्षणिक संस्थानों में तुरंत कार्यान्वयन संभव हो सके।

यदि यह पहल सफल रहती है, तो भारत में किशोर गर्भधारण, यौन शोषण और पोको एक्ट के दायरे में अनावश्यक आपराधिककरण को काफी हद तक घटाया जा सकेगा। साथ ही, युवा पीढ़ी को अधिक सुरक्षित, स्वायत्त और जागरूक नागरिक बनाते हुए सामाजिक परिवर्तन को गति मिलेगी।