कर्नाटक सरकार ने निजी व डिम्ड विश्वविद्यालयों को 15 दिनों के भीतर प्रबंधन कोटा सीटें त्यागने का निर्देश दिया, जिन्हें केएए (KEA) द्वारा सामान्य प्रवेश परीक्षा के आधार पर आवंटित किया जाएगा। 2026‑27 शैक्षणिक वर्ष में कुल 40,090 इंजीनियरिंग सीटें उपलब्ध हैं, जबकि सरकार ने शुल्क में वृद्धि भी की है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- निजी व डिम्ड विश्वविद्यालयों को 15 दिनों में प्रबंधन कोटा सीटें KEA को सौंपनी होंगी।
- 2026‑27 में कुल 40,090 इंजीनियरिंग सीटें उपलब्ध, जिनमें 37,690 निजी और 2,400 डिम्ड विश्वविद्यालयों में हैं।
- सरकारी कोटा सीटों की ट्यूशन फीस ₹88,000 तय की गई, जबकि निजी कॉलेजों में 7.5% वृद्धि लागू।
कर्नाटक सरकार ने केर्नाटक एग्ज़ामिनेशन्स अथॉरिटी (KEA) के माध्यम से निजी और डिम्ड विश्वविद्यालयों के प्रबंधन कोटा इंजीनियरिंग सीटों को भरने का निर्देश जारी किया है। यह आदेश राज्य के 28 निजी और 11 डिम्ड विश्वविद्यालयों को लागू होगा, जहाँ 2026‑27 शैक्षणिक वर्ष में क्रमशः 37,690 और 2,400 इंजीनियरिंग सीटें उपलब्ध हैं।
प्रबंधन कोटा त्यागने की प्रक्रिया
सरकार ने स्पष्ट किया कि यदि ये संस्थान प्रबंधन कोटा सीटें छोड़ते हैं, तो उन्हें केएए द्वारा आयोजित प्रथम दौर की CET काउंसिलिंग शुरू होने के 15 दिनों के भीतर KEA को सौंपना अनिवार्य है। KEA द्वारा जारी नियमों के अनुसार, छोड़ी गई सीटें सामान्य प्रवेश परीक्षा के अंकों के आधार पर आवंटित की जाएँगी, जिससे merit‑based चयन सुनिश्चित होगा।
पिछला इतिहास और मौजूदा दिशा‑निर्देश
पिछले वर्ष COMED‑K ने लगभग 18,000 सीटें KEA को सौंप दीं, क्योंकि पहली काउंसिलिंग में सीटें भर नहीं पाईं। इसी तरह कई निजी कॉलेजों ने भी हजारों प्रबंधन कोटा सीटें KEA को दीं। इस पृष्ठभूमि में, प्रो. एस. सदगोपन समिति की सिफ़ारिशों को लागू कर, सभी निजी संस्थानों पर सीट कैप लगाया गया है, जिससे अनावश्यक विस्तार को रोका जा सके।
शुल्क संरचना में बदलाव
वर्तमान शैक्षणिक वर्ष के लिए सरकार ने सरकारी कोटा इंजीनियरिंग सीटों की ट्यूशन फीस ₹88,000 निर्धारित की है। साथ ही, निजी कॉलेजों में सरकारी कोटा सीटों के लिए 7.5% शुल्क वृद्धि का आदेश जारी किया गया, जबकि निजी व डिम्ड विश्वविद्यालयों में कुल शुल्क वृद्धि का विवरण अभी तक स्पष्ट नहीं किया गया है। KEA के कार्यकारी निदेशक एच. प्रासन्ना ने कहा, “यदि निजी व डिम्ड विश्वविद्यालय प्रबंधन कोटा सीटें त्यागते हैं, तो उन्हें KEA स्वयं भर देगा।”
भविष्य की संभावनाएँ
इस कदम से कर्नाटक में इंजीनियरिंग शिक्षा का मानक सुधारने और merit‑based प्रवेश को बढ़ावा देने की उम्मीद है। हालांकि, कुछ निजी व डिम्ड विश्वविद्यालयों ने हाल ही में CSE और संबंधित कोर्सों में सीट वृद्धि के लिए NOC प्राप्त किया है, जिससे संभावित टकराव की आशंका बनी रहती है। सरकार की नज़र इस बात पर है कि अतिरिक्त सीटें नीति के अनुरूप हों और छात्रों को उचित मूल्य पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।