तेलंगाना में पीएम पोषण योजना के तहत मिलने वाले मिड-डे मील के लाभार्थियों की संख्या 2021-22 के 17.91 लाख से घटकर 2025-26 में 14.5 लाख रह गई है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा लोकसभा में दिए गए आंकड़ों ने इस गिरावट की पुष्टि की है।

मुख्य बातें

  • तेलंगाना में पीएम पोषण लाभार्थियों की संख्या में लगभग 3.4 लाख की कमी आई है।
  • 2022-23 में लाभार्थियों की संख्या 21.05 लाख के शिखर पर थी।
  • सरकार ने पोषण स्तर सुधारने के लिए अंडे और रागी जावा जैसे कदम उठाए हैं।
  • 736 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों को मंजूरी दी गई है।

लोकसभा में पेश किए गए हालिया आंकड़ों के अनुसार, तेलंगाना में 'प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण' (PM POSHAN) योजना के लाभान्वित होने वाले बच्चों की संख्या में पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय गिरावट देखी गई है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, जो संख्या 2021-22 में 17.91 लाख थी, वह 2025-26 के अनुमानित आंकड़ों में घटकर मात्र 14.5 लाख रह गई है।

यह जानकारी भाजपा सांसद माधवननी रघुनंदन राव द्वारा पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी द्वारा दी गई। आंकड़ों का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि लाभार्थियों की संख्या में उतार-चढ़ाव रहा है। वर्ष 2022-23 में यह संख्या बढ़कर 21.05 लाख तक पहुंच गई थी, लेकिन उसके बाद से इसमें लगातार गिरावट का रुझान देखा जा रहा है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह खबर?

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, लाभार्थियों की संख्या में यह कमी शिक्षा के प्रति नामांकन दर या योजना के कार्यान्वयन में किसी बड़े बदलाव की ओर संकेत करती है। पीएम पोषण योजना न केवल बच्चों की भूख मिटाती है, बल्कि उनके संज्ञानात्मक विकास के लिए आवश्यक कैलोरी और प्रोटीन भी सुनिश्चित करती है। लाभार्थियों की घटती संख्या पोषण सुरक्षा के व्यापक लक्ष्यों पर सवाल खड़े करती है।

लाभार्थियों की संख्या में यह निरंतर गिरावट राज्य की प्राथमिक शिक्षा और पोषण संबंधी पहुंच के बीच बढ़ते अंतर को दर्शाती है।

यद्यपि संख्या कम हुई है, लेकिन तेलंगाना सरकार ने भोजन की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इसमें छात्रों को बारीक चावल उपलब्ध कराना, सप्ताह में तीन बार अंडे देना और रागी जावा जैसे पौष्टिक आहार शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार ने 736 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (KGBVs) को मंजूरी दी है ताकि महिला शिक्षा को बढ़ावा मिल सके।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

पीएम पोषण योजना (पूर्व में मिड-डे मील योजना) का उद्देश्य सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को गर्म पका हुआ भोजन प्रदान करना है। यह योजना बच्चों के स्कूल में उपस्थिति बढ़ाने और कुपोषण से लड़ने के लिए भारत सरकार की एक प्रमुख पहल है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: पीएम पोषण योजना के तहत क्या पोषण मानक निर्धारित हैं?
उत्तर: प्राथमिक कक्षाओं के लिए 450 कैलोरी और 12 ग्राम प्रोटीन, जबकि उच्च प्राथमिक कक्षाओं के लिए 700 कैलोरी और 20 ग्राम प्रोटीन निर्धारित है।

प्रश्न 2: तेलंगाना में भोजन की गुणवत्ता कैसे सुनिश्चित की जा रही है?
उत्तर: नियमित निरीक्षण, खाद्य सुरक्षा जांच और आहार में अंडे एवं रागी जावा जैसे पोषक तत्वों को शामिल करके गुणवत्ता सुनिश्चित की जा रही है।

क्या आप जानते हैं?: पीएम पोषण योजना के तहत दिए जाने वाले भोजन का उद्देश्य केवल पेट भरना नहीं, बल्कि बच्चों के विकास के लिए आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व प्रदान करना भी है।