वीआईटी चेन्नई के 14वें वार्षिक दीक्षांत समारोह में पूर्व विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सचिव टी. रामासामी ने युवाओं को राष्ट्र और मानवता के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने तमिलनाडु के अनुसंधान क्षेत्र में बढ़ते प्रभुत्व पर भी प्रकाश डाला।
मुख्य बातें
- युवा न केवल अपना भविष्य बल्कि परिवार, देश और मानवता का भविष्य तय करते हैं।
- भारत के कुल शोध पत्रों (Research Papers) में तमिलनाडु की हिस्सेदारी लगभग 61% है।
- VIT चेन्नई में 4,518 छात्रों को स्नातक और पीएचडी की उपाधियाँ प्रदान की गईं।
वीआईटी (VIT) चेन्नई के 14वें वार्षिक दीक्षांत समारोह के दौरान, भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के पूर्व सचिव टी. रामासामी ने छात्रों को संबोधित करते हुए एक प्रेरणादायक संदेश दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि युवा शक्ति केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज, राष्ट्र और पूरी मानवता की दिशा निर्धारित करने का सामर्थ्य रखती है।
रामासामी ने शोध और विकास (R&D) के क्षेत्र में तमिलनाडु की अभूतपूर्व प्रगति का उल्लेख किया। उन्होंने साझा किया कि वर्ष 2000 के बाद से, तमिलनाडु अनुसंधान के क्षेत्र में एक अग्रणी राज्य के रूप में उभरा है। सांख्यिकीय आंकड़ों के अनुसार, भारत में प्रकाशित होने वाले कुल शोध पत्रों में से लगभग 61 प्रतिशत अकेले तमिलनाडु से आते हैं, जिसमें निजी विश्वविद्यालयों का योगदान 35 प्रतिशत है।
क्यों यह महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत की जनसांख्यिकीय लाभांश (Demographic Dividend) को वास्तविक आर्थिक और सामाजिक लाभ में बदलने के लिए उच्च शिक्षा और अनुसंधान में निवेश करना अनिवार्य है। यदि युवा नवाचार और शोध को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाते हैं, तो भारत वैश्विक ज्ञान अर्थव्यवस्था में शीर्ष पर होगा।
युवाओं की ऊर्जा और शोध की दृष्टि ही आने वाली शताब्दियों की नींव रखेगी।
इस अवसर पर श्रीलंका के उप उच्चायुक्त गेसानथम गीथिसवारन ने भी भारत और श्रीलंका के बीच गहरे सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों पर प्रकाश डाला। वहीं, VIT के संस्थापक और चांसलर जी. विश्वनाथन ने चिंता व्यक्त की कि भारत की तीव्र आर्थिक वृद्धि के बावजूद, उच्च शिक्षा का विस्तार विकसित देशों की तुलना में अभी भी धीमी गति से हो रहा है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में उच्च शिक्षा का ढांचा पिछले दो दशकों में तेजी से बदला है। विशेष रूप से दक्षिण भारतीय राज्य, जैसे तमिलनाडु, तकनीकी और वैज्ञानिक अनुसंधान के केंद्र बनकर उभरे हैं, जो वैश्विक मानकों को टक्कर दे रहे हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. वीआईटी चेन्नई के दीक्षांत समारोह में कितने छात्रों को सम्मानित किया गया?
इस समारोह में कुल 4,518 छात्रों को स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी की उपाधियाँ प्रदान की गईं।
2. अनुसंधान के क्षेत्र में तमिलनाडु की क्या स्थिति है?
भारत में प्रकाशित होने वाले कुल शोध पत्रों का लगभग 61% तमिलनाडु से आता है।