वयोवृद्ध प्लेबैक गायक एस. जानकी के निधन पर भारत के प्रमुख राजनेताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित की। उनके बहुभाषी गीतों ने संगीत को भाषा‑सीमा से परे ले जाकर लाखों दिलों को जोड़ा।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • एस. जानकी का निधन देश भर में शोक का कारण बना
  • तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और केंद्र सरकार के नेता उनकी विरासत को सम्मानित करते हैं
  • उनके बहुभाषी गाने भविष्य के कलाकारों को प्रेरित करते रहेंगे

वयोवृद्ध प्लेबैक गायक एस. जानकी के निधन पर भारत के विभिन्न राजनैतिक दलों के नेता गहरी शोक व्यक्त कर रहे हैं। केंद्र सरकार के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने अपने ट्विटर (X) पोस्ट में कहा कि उनका संगीत भाषा‑सीमा को पार कर लाखों लोगों को एक साथ जोड़ता है।

राजनीतिक नेताओं की श्रद्धांजलि

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने कहा, “हजारों गीतों को विभिन्न भाषाओं में गाकर उन्होंने भारतीय संगीत पर अमिट छाप छोड़ी है। राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार सहित कई प्रतिष्ठित सम्मान उन्हें मिले हैं, और उनका मीठा स्वर हमेशा याद रहेगा।” इसी तरह, डीकैम के अध्यक्ष एम.के. स्टालिन ने कहा कि उनका “मधुर गीत” तमिलनाडु के घरों में रेडियो से लेकर स्पॉटिफाई तक गूँजते रहेंगे।

दक्षिण भारत में गहरी छाप

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कहा कि एस. जानकी को “कन्नड़ सिनेमा की नाइटिंगेल” कहा जाता है और उनका सरल जीवन शैली कई गायक‑गायिकाओं के लिए प्रेरणा रहा है। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडु ने उल्लेख किया कि वह तेलुगु मिट्टी की बेटी थीं, जिन्होंने छह दशकों से अधिक समय तक संगीत की धरोहर को समृद्ध किया।

विरासत और भविष्य

उनकी बहुभाषी गायकी—तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, हिंदी और कई अन्य भाषाओं में—ने भारतीय सिनेमा को एक अंतर-भाषायी पुल प्रदान किया। संगीत प्रेमियों का मानना है कि उनका स्वर और भावनात्मक अभिव्यक्ति भविष्य के कलाकारों के लिए एक स्थायी मानक बनी रहेगी।

एस. जानकी का निधन न केवल दक्षिण भारतीय सिनेमा, बल्कि सम्पूर्ण भारतीय संगीत जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उनके गीतों का प्रभाव नई पीढ़ियों में भी जीवित रहेगा, जैसा कि विभिन्न राजनैतिक मंचों पर उनके योगदान की सराहना से स्पष्ट होता है।