88 वर्ष की आयु में निधन के बाद, दक्षिण भारतीय संगीत की शहंशाह एस. जानकी का अंत्यक्रिया पूर्ण राज्य सम्मान के साथ मैसूर के क़नियानहुंडी में आयोजित हुआ। पोती अप्सरा ने अपने दादी को ‘एक अद्वितीय प्रतिभा’ कहकर श्रद्धांजलि दी।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- एस. जानकी का निधन 11 जुलाई को, 88 वर्ष की आयु में हुआ।
- मैसूर में क़नियानहुंडी के फार्महाउस में पूर्ण राज्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
- पोती अप्सरा ने दादी के संगीत और व्यक्तित्व को अनूठा बताया, जिससे भारत‑विश्व में शोक की लहर फैली।
दक्षिण भारत की संगीत जगत की शाश्वत आवाज़, एस. जानकी, जिन्होंने लगभग 20 भारतीय भाषाओं में 40,000 से अधिक गीत रिकॉर्ड किए, का 11 जुलाई को मैसूर के अपोलो बीजीएस अस्पताल में कई बार दिल का दौरा पड़ने के बाद निधन हो गया। उनका जीवन‑परिचय, छह दशकों से अधिक का करियर, और अभूतपूर्व संगीत प्रतिभा ने कई पीढ़ियों को प्रेरित किया।
अंतिम संस्कार की प्रक्रिया
राष्ट्र के मान्यवरों द्वारा सम्मानित, जानकी की अंत्यसंस्कार क़नियानहुंडी में स्थित उनके पारिवारिक फार्महाउस में आयोजित हुआ। सुबह से ही महाराजा कॉलेज ग्राउंड्स में उनके शव को रखा गया, जहाँ फ़िल्म‑संगीत उद्योग के सहयोगी, राजनेता और जनता ने अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित की। शाम 5 बजे आयोजित अंतिम संस्कार में राज्य के सभी मानद पदक और झंडे झंडे फहराए गए।
परिवार की भावनाएँ
पोती अप्सरा ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, “यह केवल हमारे परिवार का नहीं, बल्कि सम्पूर्ण राष्ट्र और विश्व का बड़ा नुकसान है।” उन्होंने दादी के संगीत को “सबसे अभिव्यक्तिपूर्ण” और “भावनात्मक गहराई वाला” बताया। अप्सरा ने यह भी उल्लेख किया कि जानकी ने उन्हें संगीत से परे जीवन के मूल्यों—दयालुता, प्रेम और हँसी—सिखाए। उनका मानना है कि दादी का संगीत हमेशा जीवित रहेगा, क्योंकि “वो कभी सच‑मुच नहीं गईं, उनका स्वर हमेशा हमारे साथ रहेगा।”
राजनीतिक और फिल्म जगत की श्रद्धांजलि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि “उनका निधन संगीत और संस्कृति की दुनिया के लिए अपरिवर्तनीय क्षति है।” तमिलनाडु के मुख्यमंत्री वी. जय ने उनकी बहुभाषी संगीत विरासत को “अद्वितीय” कहा, जबकि आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडु ने उन्हें “तेलुगु धरती की बेटी” कहा। फिल्म जगत से चिरंजीवी, त्रिशा, और चिन्मयी जैसे कलाकारों ने भी उनकी आवाज़ की अद्भुत शक्ति और कई फिल्मों में उनके योगदान को याद किया।
संगीत में उनका योगदान
एस. जानकी ने 1950 के दशक के अंत में प्लेबैक गायकी शुरू की और चार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार तथा पद्म विभूषण सहित कई राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त किए। उन्होंने तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, हिन्दी, ओडिया, पंजाबी और बंगाली सहित लगभग सभी प्रमुख भारतीय भाषाओं में गीत गाए। उनका संगीत न केवल फिल्म की कहानी को आगे बढ़ाता था, बल्कि विभिन्न सामाजिक और भावनात्मक पहलुओं को भी अभिव्यक्त करता था।
उनकी विरासत न केवल रिकॉर्डिंग स्टूडियो में बल्कि उनके श्रोताओं के दिलों में भी जीवित है, जहाँ हर नई पीढ़ी उनके गीतों को सुनकर प्रेरित होती है।