बेंगलुरु जल आपूर्ति एवं सीवरेज बोर्ड (BWSSB) ने बताया कि मौजूदा कोवरी जल से शहर को अगले 3‑4 महीनों तक पर्याप्त पानी मिल सकेगा। लेकिन जल‑संकट की आवर्ती प्रकृति को देखते हुए विशेषज्ञ सतत जल‑प्रबंधन की माँग कर रहे हैं।

बेंगलुरु में जल‑सुरक्षा की बहस फिर से गरम हो गई है, क्योंकि लगातार अनियमित मौसमी परिवर्तन शहर के पानी के स्रोतों पर दबाव डाल रहे हैं। बेंगलुरु जल आपूर्ति एवं सीवरेज बोर्ड (BWSSB) ने कहा कि कोवरी जल के वर्तमान उपयोग में लगभग 1,900 MLD (मिलियन लीटर प्रतिदिन) है, जबकि अतिरिक्त 300 MLD की क्षमता अभी भी उपलब्ध है। इस प्रकार कोवरी V चरण के साथ कुल उपलब्ध जल 2,225 MLD तक पहुँचता है, जिससे अगले तीन‑चार महीनों में आपूर्ति में कोई बड़ी कमी नहीं दिखती।

वर्तमान जल‑स्थिति और मौसमी प्रभाव

जून 1 से जुलाई 9 तक बेंगलुरु शहरी क्षेत्र में वर्षा सामान्य से 35 % कम रही, जबकि दक्षिण‑केरला में 24 % की गिरावट दर्ज की गई। यह कमी न केवल जल आपूर्ति बल्कि पावर ग्रिड पर भी असर डालती है, क्योंकि कई जल‑विद्युत संयंत्र वर्षा‑आधारित जलाशयों पर निर्भर करते हैं।

भू‑जल गिरावट और बोरेवेल पर निर्भरता

BWSSB की अध्यक्ष मनजुला एन. ने स्वीकार किया कि कुछ क्षेत्रों में जल‑संकट का मूल कारण भू‑जल का अत्यधिक शोषण और बोरेवेल पर अत्यधिक निर्भरता है। उन्होंने बताया कि जल‑भंडारण स्तरों की निरंतर निगरानी की जा रही है और यदि अगले महीनों में कोई वर्षा नहीं भी हुई, तो कोवरी जल प्रणाली से पीने योग्य पानी की मांग को पूरा किया जा सकता है।

विशेषज्ञों की दीर्घकालिक सिफारिशें

अशोका ट्रस्ट फॉर रिसर्च इन इकोलॉजी एंड द एनवायरनमेंट की वरिष्ठ सहयोगी प्रिया जामवाल ने कहा कि अनियमित वर्षा पैटर्न ने शहरी जल‑सुरक्षा को अस्थिर कर दिया है, जिससे टैंकर जल पर निर्भरता बढ़ गई है। उन्होंने विशेष रूप से कमजोर समुदायों के लिए जोखिम उजागर किया, जिनके पास भरोसेमंद पाइप्ड जल नहीं है और उन्हें महंगे टैंकर जल पर निर्भर रहना पड़ता है।

जामवाल ने यह भी नोट किया कि 2024 के जल‑संकट के बाद सार्वजनिक जागरूकता में सुधार हुआ है। कई हाई‑राइज़ अपार्टमेंट अब अपशिष्ट जल को उपचारित कर फ्लशिंग, बागवानी आदि में पुन: उपयोग कर रहे हैं, जिससे ताज़ा जल पर दबाव कम हो रहा है। साथ ही, जल‑सिस्टम में लीक, चोरी और गैर‑राजस्व जल को कम करने के प्रयास तेज़ हुए हैं।

सहयोग और भविष्य की दिशा

वर्तमान में BWSSB, ग्रेटर बेंगलुरु ऑथॉरिटी (GBA), जल‑परिवर्तन सेल और विभिन्न सिविल‑सॉसाइटी संगठनों के बीच सहयोग बढ़ा है। जामवाल ने कहा, “सहयोगी दृष्टिकोण ही जल‑संकट को स्थायी रूप से हल कर सकता है, जबकि जल‑सर्कुलरिटी, भू‑जल नियमन और जल‑सुरक्षा के लिए नीतिगत ढांचा बनाना अनिवार्य है।”