पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कोइंबटूर में चार प्रमुख वन्यजीव निकायों की बैठकें कीं, जहाँ 100 से अधिक परियोजनाओं का मूल्यांकन किया गया। गुजरात में जन्मे दूसरे ग्रेट इंडियन बस्टर्ड चूज़े की शुरुआती 40 दिनों की सफलता को भी सार्वजनिक किया गया।
नई दिल्ली – 10 जुलाई 2026 को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के मंत्री भूपेंद्र यादव ने कोइंबटूर में चार प्रमुख वन्यजीव निकायों की बैठकें कीं। इन बैठकों में राष्ट्रीय वन बोर्ड (SC‑NBWL), राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA), केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (CZA) और भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के प्रतिनिधियों को एक साथ लाया गया। प्रमुख एजेंडा में 100 से अधिक विकास परियोजनाओं के लिए वन्यजीव मंजूरी का मूल्यांकन शामिल था।
बैठक का एजेंडा और प्रस्तावों का विवरण
SC‑NBWL की बैठक में कुल 118 प्रस्तावों को सूचीबद्ध किया गया, जिनमें 24 रक्षा परियोजनाएँ, 23 सड़क‑पुल परियोजनाएँ और 12 पावर ट्रांसमिशन लाइनों जैसे बुनियादी ढाँचे के काम शामिल थे। सरकारी प्रेस नोट के अनुसार, प्रत्येक प्रस्ताव का मूल्यांकन पर्यावरणीय प्रभाव, सार्वजनिक कल्याण, राष्ट्रीय विकास और शमन उपायों के आधार पर किया गया। इस प्रक्रिया का उद्देश्य वन्यजीव और उनके आवासों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, जबकि भारत की बुनियादी जरूरतों को भी पूरा करना है।
ग्रेट इंडियन बस्टर्ड की सफलता
बैठकों के बाद, मंत्री ने ट्विटर (X) पर घोषणा की कि ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIB) का दूसरा चूज़ा, जो 21 मई को गुजरात के नालिया में ‘जम्पस्टार्ट’ विधि से जन्मा था, ने 40 दिनों की नाजुक अवधि को सफलतापूर्वक पार कर लिया है। इस विधि में एक कैद बस्टर्ड प्रजनन केन्द्र से प्राप्त अंडे को नालिया में एक निष्फल अंडे के स्थान पर रखकर, स्थानीय महिला बस्टर्ड द्वारा इन्क्यूबेट किया जाता है। यह तकनीक राजस्थान के जैसलमेर जिले के दो प्रजनन केन्द्रों में सफलतापूर्वक लागू की गई है और बस्टर्ड की जनसंख्या को पुनर्स्थापित करने की आशा जगाई है।
पिगमी हॉग और अन्य संरक्षण पहलों पर चर्चा
SC‑NBWL ने पर्यावरण मंत्रालय के स्पीशीज़ रिकवरी प्रोग्राम में पिगमी हॉग को शामिल करने की संभावनाओं पर भी विचार किया। पिगमी हॉग, जो भारत के उत्तर‑पूर्वी भाग में दुर्लभता की सीमा पर है, को विशेष संरक्षण उपायों की आवश्यकता है। इसके अतिरिक्त, समिति ने बड़ी एक-सींग वाले गैंडे और ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के दीर्घकालिक संरक्षण रणनीतियों पर विस्तृत चर्चा की, जिससे इन प्रजातियों के लिए सुरक्षित आवास और प्रवास मार्ग सुनिश्चित किए जा सकें।
भविष्य की दिशा और राष्ट्रीय प्रभाव
इन बैठकों का नतीजा यह है कि भारत के विकास प्रोजेक्ट्स को वन्यजीव संरक्षण के साथ संतुलित करने की नई दिशा स्थापित हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पर्यावरणीय शमन उपाय सुदृढ़ नहीं किए जाते, बड़े बुनियादी ढाँचे के कामों से वन्यजीवों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। मंत्री यादव की पहल इस संतुलन को स्थापित करने का एक मॉडल बन सकती है, जिससे भविष्य में और अधिक सतत विकास नीतियों का मार्ग प्रशस्त होगा।