गाज़ियाबाद में तीन साल की बच्ची और दिल्ली के सामयपुर बड़ली में सात साल के बच्चे की मौत तेज़ बारिश के कारण जमा हुए पानी में डूबने से हुई। अधिकारियों ने राहत‑कार्यों में कमी और जल निकासी की अपर्याप्तता को मुख्य कारण बताया।

गुज़रते हुए बरसात के आँधियों ने उत्तरप्रदेश के गाज़ियाबाद और दिल्ली के सामयपुर बड़ली क्षेत्रों में जल स्तर को दो‑तीन फुट तक बढ़ा दिया। इस अचानक बढ़े हुए जल में दो बच्चे डूब गए – गाज़ियाबाद की तीन साल की बच्ची मनवी और दिल्ली के सात साल के छात्र रेहान

घटना कैसे हुआ

गाज़ियाबाद के सरवोदय नगर में रहने वाले परिवार के पिता ने घर से बाहर निकलते ही बच्ची ने उनका अनुसरण किया। घर के बाहर जमा पानी में बच्ची को लगभग दस मिनट बाद खोजा गया, जब वह घुटन के कारण श्वासहीन हो चुकी थी। स्थानीय पुलिस ने बताया कि रात‑भर लगातार बारिश ने घर के भीतर से बाहर तक जल स्तर को बढ़ा दिया था, जिससे बच्ची ने गलती से गड्ढे में कदम रख दिया।

दिल्ली में समान त्रासदी

दिल्ली के संजय कॉलोनी में रहने वाले सात साल के रेहान ने अपने छोटे भाई को साथ लेकर पानी भरे खाली प्लॉट में गया। अचानक गहरा जल उसके पैर में फँस गया और वह डूब गया। उसके परिवार ने पानी के किनारे रखी बोतल देखी, जिससे उन्हें संदेह हुआ और तुरंत खोज शुरू की। रेहान को बरसात वाले पानी में डूबा पाया गया और तुरंत बुरारी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने मृत घोषित किया।

पिछले वर्षों की समान घटनाएँ

स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब जल जमाव ने बच्चों की जान ली है। चार साल पहले, एक स्कूल‑जाने वाले लड़के का शरीर 1.5 किमी दूर तक निकला था, जब वह नाली में डूब गया था। ऐसे कई मामलों ने नागरिकों को जल निकासी प्रणाली की खामी पर सवाल उठाने पर मजबूर किया।

प्रणालीगत चुनौतियाँ और समाधान

इंडियन मीटियोरोलॉजिकल डिपार्टमेंट (IMD) के आंकड़ों के अनुसार, गाज़ियाबाद के हिंदोण और कमला नेहरू नगर में क्रमशः 28.5 mm और 31.5 mm वर्षा दर्ज की गई। शहरों में पुरानी नाली, अव्यवस्थित निर्माण और जल निकासी के अपर्याप्त नेटवर्क ने इस आपदा को बढ़ा दिया। विशेषज्ञों का तर्क है कि जल‑संकट प्रबंधन में डिजिटल मॉनिटरिंग, समय‑समय पर नालियों की सफ़ाई और जल‑संचयन के लिए सार्वजनिक स्थल बनाना आवश्यक है।

राज्य सरकार और स्थानीय नगरपालिका को न केवल त्वरित बचाव कार्यों पर ध्यान देना चाहिए, बल्कि भविष्य में ऐसी आपदाओं को रोकने के लिए शहरी योजना में जल‑प्रबंधन को प्रमुखता देनी चाहिए।