कोइम्बटूर के सलीम अली सेंटर फॉर ऑर्निथोलॉजी एंड नेचर हिस्ट्री (SACON) में मानव‑वन्यजीव संघर्ष (HWC) पर केंद्रित राष्ट्रीय स्तर का उत्कृष्टता केंद्र (CoE) स्थापित हुआ। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेन्द्र यादव ने इसे भारत की संरक्षण चुनौतियों के समाधान के रूप में प्रस्तुत किया।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • राष्ट्रीय स्तर का मानव‑वन्यजीव संघर्ष केंद्र कोइम्बटूर में स्थापित
  • पर्यावरण मंत्री भूपेन्द्र यादव ने नीति‑निर्माण और तकनीकी समाधान पर ज़ोर दिया
  • राष्ट्रीय पोर्टल डेटा‑प्रबंधन और संघर्ष शमन को सुदृढ़ करेगा

भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के प्रमुख अनुसंधान संस्थान, सलीम अली सेंटर फॉर ऑर्निथोलॉजी एंड नेचर हिस्ट्री (SACON), कोइम्बटूर ने आज मानव‑वन्यजीव संघर्ष (HWC) पर केंद्रित एक राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र (CoE) का शुभारंभ किया। यह पहल सरकार की वन्यजीव संरक्षण रणनीति में एक मील का पत्थर मानी जा रही है, क्योंकि भारत में वन्यजीव‑मानव टकराव की आवृत्ति पिछले दो दशकों में तीव्र गति से बढ़ी है।

पृष्ठभूमि और आवश्यकता

हैबिटेट विघटन, भूमि‑उपयोग परिवर्तन और तेज़ी से शहरी विस्तार के कारण वन्यजीवों का आवास छोटा हो रहा है, जिससे बाघ, तेंदुआ और हाथी जैसे प्रमुख प्रजातियों का मनुष्यों के साथ टकराव बढ़ा है। इस संघर्ष ने न केवल मानवीय जीवन और संपत्ति को खतरा पहुँचाया है, बल्कि वन्यजीव संरक्षण के लिए भी गंभीर चुनौतियाँ उत्पन्न की हैं। इसलिए, एक समन्वित, वैज्ञानिक‑आधारित मंच की आवश्यकता थी जो शोध, नीति‑निर्माण, क्षमता निर्माण और सर्वोत्तम प्रथाओं के प्रसार को एक साथ लाए।

उद्घाटन समारोह और प्रमुख बयानों

उद्घाटन में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन के केंद्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव ने कहा कि “ह्यूमन‑वाइल्डलाइफ कॉन्फ्लिक्ट भारत की सबसे बड़ी संरक्षण‑विकास चुनौतियों में से एक बन चुका है” और इस केंद्र को “समाधान‑उन्मुख” बनाकर आधुनिक तकनीकी उपायों को अपनाने की बात कही। उन्होंने विशेष रूप से बाघ अभयारण्यों के बाहर बाघों, तथा तेंदुए और हाथियों के साथ टकराव को कम करने के लिए नीति‑निर्माण पर बल दिया।

डिजिटल पोर्टल और भविष्य की दिशा

समारोह के दौरान राष्ट्रीय मानव‑वन्यजीव संघर्ष पोर्टल का भी शुभारम्भ हुआ, जो डेटा प्रबंधन, ज्ञान‑साझाकरण और निर्णय‑समर्थन के लिए एक डिजिटल मंच प्रदान करेगा। यह पोर्टल राज्य वन विभागों, शोध संस्थानों और स्थानीय समुदायों को वास्तविक‑समय में टकराव की रिपोर्टिंग, विश्लेषण और रोकथाम उपायों को लागू करने में सक्षम बनाएगा।

प्रभाव और अपेक्षित परिणाम

CoE के माध्यम से भारत में 10 से अधिक अनुसंधान परियोजनाओं को वित्तीय समर्थन, प्रौद्योगिकी साझेदारी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग मिलने की संभावना है। दीर्घकालिक लक्ष्य है “सहअस्तित्व और सामंजस्य” को मूल मंत्र बनाकर वन्यजीव‑मानव संबंध को स्थायी बनाना, जिससे दोनों पक्षों के आर्थिक और पारिस्थितिक लाभ सुनिश्चित हों।