कोलकाता और आसपास के क्षेत्रों में 10‑15 जुलाई तक लगातार बारिश की संभावना है। दक्षिण व उत्तर बंगाल में भी पीले अलर्ट के तहत तेज़ बारिश, बिजली‑तड़ित और तेज़ हवाओं की चेतावनी जारी की गई है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • कोलकाता में 10‑15 जुलाई तक लगातार बारिश की संभावना
  • दक्षिण व उत्तर बंगाल में पीला अलर्ट जारी
  • भारी बारिश से बवंडर, बाढ़ और भूमि‑स्लिप की आशंका

कोलकाता 10 जुलाई से 15 जुलाई तक एक तीव्र मौसमी दौर का सामना करने के लिए तैयार हो रहा है। बंगाल की खाड़ी से आने वाली समृद्ध moisture और एक अनुकूल मोनसून ट्रॉफ की वजह से शहर में बादल छाए रहेंगे और हल्की‑से‑मध्यम बारिश के साथ कभी‑कभी तूफ़ानी शौर्स भी आएंगे। अधिकतम तापमान 32°C तक पहुंचने की संभावना है, जबकि रात के समय तापमान 26°C तक गिर सकता है। हाउरा, दुमदुम और सॉल्ट लेक जैसे निकटवर्ती क्षेत्र भी समान मौसमीय पैटर्न देखेंगे, हाउरा में रात के न्यूनतम तापमान 25°C तक गिर सकता है।

दक्षिण बंगाल में पीला अलर्ट

दक्षिण बंगाल के कई जिलों को 10 जुलाई से 13 जुलाई तक हल्की‑से‑मध्यम बारिश के साथ 7‑11 सेंटीमीटर की तीव्र वर्षा की संभावना के कारण पीला अलर्ट मिला है। उत्तर व दक्षिण 24 परगना, पूर्व व पश्चिम मिदनापुर, मुर्शिदाबाद जैसे प्रमुख जिलों को बौछार और तेज़ हवाओं (40‑50 किमी/घं) से प्रभावित होने की चेतावनी दी गई है। इस अवधि में बिजली‑तड़ित का जोखिम भी बना रहेगा, जिससे सार्वजनिक सुरक्षा के लिए सावधानी बरतने का आग्रह किया गया है।

उत्तर बंगाल में भारी बारिश

उत्तरी जिलों—दार्जिलिंग, कालिम्पोंग, जलपाईगुड़ी, अलीपुरदुर्ग और कूछबिहार—में 10 जुलाई से 15 जुलाई तक भारी‑से‑बहुत भारी वर्षा की संभावना है। तेज़ हवा (30‑40 किमी/घं) और बार-बार बिजली‑तड़ित इन क्षेत्रों में बाढ़, जलभराव और पहाड़ी इलाकों में भू-स्लिप का कारण बन सकती है। टेस्ता, टॉर्सा और जलधाका जैसी प्रमुख नदियों के जलस्तर में अचानक वृद्धि देखी जा सकती है।

सुरक्षा के उपाय

प्राधिकरणों ने नागरिकों से आग्रह किया है कि सक्रिय तूफ़ानी स्थितियों में सुरक्षित, दृढ़ संरचनाओं में शरण लें और पेड़, बिजली के पोल या खुले जल निकायों के पास खड़े रहने से बचें। विशेषकर पहाड़ी क्षेत्रों में संभावित भू‑स्लिप को रोकने के लिए स्थानीय प्रशासन ने आपातकालीन प्रतिक्रिया टीमों को तैनात कर दिया है।

मौसम विभाग की लगातार अपडेटेड रिपोर्टें दर्शाती हैं कि इस मौसमी अवधि में जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को देखते हुए मौसमी पैटर्न में असामान्य परिवर्तन हो रहा है, जिससे भविष्य में अधिक तीव्र और अनियमित बारिश की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।