स्वयं दक्षिण‑पश्चिमी मानसून ने देश के कई हिस्सों में भारी बारिश जारी रखी, जिससे उत्तराखंड में लैंडस्लाइड, उत्तर प्रदेश व हिमाचल में नदियों का जलस्तर बढ़ा और कुल 10 लोगों की मौत हुई। सरकार ने कई जिलों में स्कूल बंद कर दी हैं और आपदा प्रबंधन बलों को तैनात किया है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • 10 लोगों की मौतें दर्ज
  • उत्तरााखंड में लैंडस्लाइड और हाईवे बाधित
  • यूपी‑हिमाचल में नदियों का जलस्तर बढ़ा

मॉनसून की प्रगति और मौसम विभाग की चेतावनी

दक्षिण‑पश्चिमी मानसून ने देश के अधिकांश भाग को कवर कर लिया है, और भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने कहा है कि आने वाले कई दिनों तक भारी बारिश जारी रहने की संभावना है। इस सप्ताह के अंत में जारी रेड अलर्ट के तहत उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्सों में अत्यधिक वर्षा की आशंका है, जबकि उत्तराखंड में स्थानीय स्तर पर तीव्र बौछार की भविष्यवाणी की गई है।

उत्तरााखंड में लैंडस्लाइड और चार धाम यात्रा पर असर

उत्तरााखंड के उत्तरकाशी जिले में नालू पानी पर लैंडस्लाइड ने गंगोत्री हाईवे को पूरी तरह बंद कर दिया, जिससे चार धाम यात्रा बाधित हुई। रोड‑क्लियरिंग टीमें त्वरित कार्य कर रही हैं, लेकिन कई यात्रियों को वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ा। रुद्रप्रयाग जिले में अलकनंदा और मंदाकिनी नदियों का जलस्तर तेज़ी से बढ़ा, जिससे स्कूलों को एक दिन के लिए बंद करना पड़ा।

उत्तर प्रदेश‑हिमाचल में नदी‑पानी का उछाल

उत्तर प्रदेश में गाज़ीआबाद, मेरठ, हापुर आदि जिलों में भारी बारिश के कारण नदियों का जलस्तर खतरे के करीब पहुँच गया, जिससे कई स्कूलों को बंद करने का आदेश जारी किया गया। प्रवासी बाढ़ के खतरे को देखते हुए, प्रदेश ने तापमान में 2‑4°C की गिरावट की भी भविष्यवाणी की है। हिमाचल प्रदेश में शिमला व सिरमौर जिलों में 75 से अधिक सड़कों पर जलभराव और 29 ट्रांसफॉर्मर एवं पाँच जल आपूर्ति योजनाओं को नुकसान पहुँचा।

गुजरात‑सूरत और केरल‑वायनाड में अतिरिक्त आपदा स्थिति

सूरत जिले में 24 घंटे में 358 mm बारिश ने व्यापक बाढ़ उत्पन्न की, जिससे 17 लोगों की मौत हुई और कई क्षेत्रों में निकासी कार्य चल रहा है। राज्य के मुख्यमंत्री ने दीर्घकालिक जल निकासी समाधान की मांग की। केरल के वायनाड में इस हफ्ते एक लैंडस्लाइड में छह लोग मारे गए; खोज‑बचाव दल कुत्तों की मदद से दो अनगिनत लोगों की तलाश जारी रखे हैं, जबकि लगातार बारिश से मलबा हटाने की गति धीमी है।

आगे की संभावनाएँ और सरकारी प्रतिक्रिया

IMD ने चेतावनी दी है कि मौसमी सक्रिय चरण अभी समाप्त नहीं हुआ है, इसलिए नागरिकों को सतर्क रहना चाहिए। कई राज्य सरकारों ने आपदा प्रबंधन इकाइयों को सुदृढ़ किया है, और जल निकासी के लिए दीर्घकालिक बुनियादी ढाँचा बनाने की दिशा में कार्य शुरू किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण भविष्य में ऐसे तीव्र और बार‑बार होने वाले मानसून‑सम्बन्धी आपदाओं की संभावना बढ़ेगी।