नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) द्वारा 33 पेड़ों की अवैध कटाई के मामले में ₹2.65 करोड़ का पर्यावरणीय मुआवजा वसूलने का आदेश दिया है।

वाराणसी स्थित प्रतिष्ठित बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) एक बड़े कानूनी संकट में फंस गई है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने विश्वविद्यालय परिसर में 33 पेड़ों की अवैध कटाई के लिए उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) को ₹2.65 करोड़ से अधिक का पर्यावरणीय मुआवजा वसूलने का कड़ा निर्देश दिया है। यह मामला पर्यावरण संरक्षण और संस्थागत जवाबदेही के बीच एक बड़ी बहस को जन्म देता है।

मामले की पृष्ठभूमि और कानूनी संघर्ष

इस पूरे विवाद की शुरुआत अधिवक्ता सौरभ तिवारी द्वारा दायर एक याचिका से हुई थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि BHU के विशाल 1,300 एकड़ के हरित परिसर में नियमों की अनदेखी करते हुए पेड़ों को अवैध रूप से काटा जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए, NGT ने एक संयुक्त समिति का गठन किया था। इस समिति की जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि परिसर से कुल 33 पेड़ों की अवैध कटाई की गई थी, जिनमें सात चंदन के बेशकीमती पेड़ और 26 अन्य प्रजातियों के पेड़ शामिल थे।

प्रक्रिया में देरी और NGT की चेतावनी

अदालत के दस्तावेजों के अनुसार, NGT ने अगस्त 2025 में ही UPPCB को इस मुआवजे का आकलन करने और वसूली प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया था। हालांकि, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड निर्धारित तीन महीने की समय सीमा के भीतर इस कार्य को पूरा करने में विफल रहा। जब याचिकाकर्ता सौरभ तिवारी ने इस देरी के खिलाफ निष्पादन आवेदन (Execution Application) दायर किया, तब बोर्ड ने तर्क दिया कि कुछ उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के कारण वसूली शुरू नहीं हो सकी।

इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए, NGT की पीठ, जिसमें चेयरपर्सन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद शामिल थे, ने UPPCB को अंतिम चेतावनी देते हुए तीन महीने का अतिरिक्त समय दिया है ताकि ₹2,65,06,877.08 की राशि की वसूली सुनिश्चित की जा सके।

क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण का दावा

दूसरी ओर, संभागीय वन अधिकारी (DFO) की रिपोर्ट में यह उल्लेख किया गया है कि BHU ने अपनी गलती सुधारने के लिए क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण (Compensatory Afforestation) किया है। रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में 978 पेड़ लगाए गए थे, जिनमें से 859 पौधे वर्तमान में स्वस्थ स्थिति में पाए गए हैं। हालांकि, NGT ने स्पष्ट किया है कि वृक्षारोपण एक अलग प्रक्रिया है और अवैध कटाई के लिए निर्धारित वित्तीय दंड का भुगतान अनिवार्य है।