दिल्ली के राष्ट्रीय जू में 7 जुलाई को महागौरी ने तीन एशियन शेर के शावक जन्मे। यह दो वर्षों में इस प्रजनन जोड़ी की दूसरी सफल लिटर है, जो लुप्तप्राय शेर की संरक्षण में महत्वपूर्ण कदम है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- महागौरी ने 7 जुलाई को तीन एशियन शेर के शावक जन्मे
- यह दो साल में इस जोड़ी की दूसरी सफल लिटर है
- जु में कुल नौ एशियन शेर हैं, जो प्रजाति के संरक्षण में मदद करेंगे
राष्ट्रीय प्राणि उद्यान (NZI) के एक शांत मातृत्व एन्क्लोज़र में तीन दिन के नवजात एशियन शेर के शावक अपनी माँ महागौरी के पास लटके हुए दिखाई दे रहे हैं। इस जन्म को 7 जुलाई को सार्वजनिक रूप से घोषित किया गया, जिससे यह दो साल में प्रजनन जोड़ी महागौरी‑महेश्वर की दूसरी सफल लिटर बन गया।
प्रजनन सफलता का महत्व
एशियन शेर (Panthera leo persica) केवल गुजरात के गिर क्षेत्र में बिखरी हुई जंगली आबादी के कारण लुप्तप्राय मानी जाती है। दिल्ली ज़ू ने 2009 के बाद से इस प्रजाति के शावक नहीं देखे थे, इसलिए 2025 में पहले शावक के जन्म के बाद यह दोबारा सफलता एक महत्वपूर्ण माइलस्टोन है। इस प्रजनन कार्यक्रम का लक्ष्य जंगली जनसंख्या के पूरक के रूप में एन्क्लोज़र में स्वस्थ, आनुवंशिक विविधता वाला समूह तैयार करना है।
देखभाल के लिए 'हैंड्स‑ऑफ़' दृष्टिकोण
जु के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि शावकों की देखभाल में न्यूनतम मानव हस्तक्षेप अपनाया गया है। 24‑घंटे CCTV निगरानी के साथ, केवल चिकित्सा आपातकाल में ही स्टाफ हस्तक्षेप करता है। इस दृष्टिकोण ने माँ शेर की प्राकृतिक मातृत्व प्रवृत्ति को सुरक्षित रखा, जिससे शावकों को स्वाभाविक रूप से स्तनपान और सुरक्षा मिलती रही।
समूह का वर्तमान आकार और भविष्य की योजना
नए शावक के साथ, जू में कुल नौ एशियन शेर हैं: तीन नर (सुधर्म, महेश्वर, कार्तिक) और तीन मादा (महागौरी, शैलजा, करनी) तथा तीन नवजात शावक। 2021 में गुजरात के साक्करबौग ज़ू से लाए गए महागौरी, महेश्वर और शैलजा ने प्रजनन क्षमता को सिद्ध किया है। अधिकारियों ने बताया कि भविष्य में और भी जोड़े को एन्क्लोज़र में जोड़ने की योजना है, जिससे आनुवंशिक बॉटलनेक से बचा जा सके।
वैश्विक संरक्षण पर प्रभाव
एशियन शेर को IUCN रेड लिस्ट में “एंडेंजरड” वर्गीकरण मिला है। इस प्रकार के ex‑situ प्रजनन प्रयास जंगली प्रजातियों के लिए बैकअप जनसंख्या बनाते हैं, जो भविष्यमें पुनर्वास या जीन पूल सुदृढ़ीकरण में सहायक हो सकते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि दिल्ली ज़ू की निरंतर सफलता भारत की जैव विविधता नीति में एक मॉडल केस बन सकती है, खासकर जब जंगली आवास क्षरण की गति तेज हो रही है।