सुप्रीम कोर्ट ने सभी नागरिकों को सुरक्षित और स्पष्ट रूप से चिन्हित फुटपाथों पर चलने का मौलिक अधिकार घोषित किया। इस दिशा में बेंगलुरु नगरपालिका ने इस महीने से 'सेफ फुटपाथ' अभियान शुरू किया, लेकिन अतिक्रमण और असमान डिज़ाइन जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- सुप्रीम कोर्ट ने फुटपाथों को मौलिक अधिकार घोषित किया।
- बेंगलुरु ने अतिक्रमण हटाकर सुरक्षित फुटपाथ बनाने का अभियान शुरू किया।
- विक्रेताओं, अनियमित पार्किंग और असमान फुटपाथ संरचना जैसी समस्याएँ अभी भी राहगीरों को प्रभावित कर रही हैं।
जिला अदालत ने हाल ही में यह स्पष्ट कर दिया कि भारतीय संविधान के तहत प्रत्येक नागरिक को सुरक्षित, स्पष्ट रूप से चिह्नित और अच्छी तरह रखरखाव वाले फुटपाथों पर चलने का मौलिक अधिकार है। इस निर्णय के बाद बेंगलुरु की सिविक प्रशासन ने इस महीने से ‘सेफ फुटपाथ’ नामक एक व्यापक अभियान शुरू किया, जिसका उद्देश्य फुटपाथों को बाधाओं से मुक्त कर राहगीरों को सहज यात्रा प्रदान करना है।
पृष्ठभूमि और मौजूदा स्थिति
बेंगलुरु के फुटपाथ, जो कभी शहर की चाल-फिर की धुरी थे, अब कई तरह की अड़चनों से जर्जर हो गए हैं। ढीले एर्टन पॉट, निर्माण के मलबे, फेंके गए फर्नीचर, कूड़ा‑कचरा और अनियमित रूप से खड़ी गाड़ियों ने पैदल यात्रियों के लिए रास्ता कठिन बना दिया है। परिणामस्वरूप, कई बार वाहन भी फुटपाथ पर खींचे जाने लगते हैं, जिससे ट्रैफ़िक जाम और सुरक्षा जोखिम दोनों बढ़ते हैं।
आंकड़े और शहताब
2024 में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के अनुसार बेंगलुरु ने भारत के मेगा शहरों में पैदल यात्री मौतों की संख्या में शीर्ष स्थान बनाए रखा, हालांकि 2023 के 292 मामलों से यह संख्या 2024 में 246 तक गिर गई। यह गिरावट आंशिक रूप से नई सुरक्षा पहलों के कारण हो सकती है, परंतु फुटपाथों की बुनियादी समस्याएं अभी भी अनसुलझी हैं।
स्थानीय लोगों की आवाज़
पलेस गुट्टहल्ली से रोज़ाना बस से यात्रा करने वाली कक्षा‑12 की छात्रा चेतना कहती हैं, “पैदल चलना अब एक खतरा बन गया है; कई जगहों पर फुटपाथ अचानक संकरी हो जाता है या पूरी तरह गायब हो जाता है।” इसी तरह, विज़ुअली‑चैलेंज्ड नागरिक रवि ने बताया कि “फुटपाथ बहुत ऊँचे हैं, ऊँचाई में लगातार बदलाव के कारण मैं अक्सर गिरने के डर से सड़क पर ही चलना पसंद करता हूँ।” यह दिखाता है कि मौजूदा फुटपाथ संरचना न केवल आम जनता बल्कि विकलांग और बुजुर्ग नागरिकों के लिए भी बड़ी कठिनाई पैदा करती है।
‘सेफ फुटपाथ’ अभियान की चुनौतियां
ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) ने अतिक्रमण हटाने का वादा किया, परंतु कई जगहों पर रस भरे जूस काउंटर, आइसक्रीम कियॉस्क और पान स्टॉल को अभी भी फुटपाथ पर देखा गया। इसके अलावा, दोपहिया वाहन, बीडब्ल्यूएसएसबी और पुलिस की आधिकारिक गाड़ियां भी अक्सर फुटपाथ पर पार्क होती हैं, जिससे अभियान की प्रभावशीलता पर सवाल उठते हैं।
भविष्य में यदि इन अड़चनों को पूरी तरह से हटाया जा सके और फुटपाथों का एक समान, सुलभ डिजाइन लागू किया जा सके, तो बेंगलुरु को एक सच‑मुच्छा पैदल‑मित्र शहर बनाने की राह पर ले जा सकता है। अभी के लिए, यह अभियान शहर की चल-फिर की संस्कृति में बदलाव लाने के लिये एक महत्वपूर्ण कदम है, परंतु इसके वास्तविक प्रभाव को देखने के लिये दीर्घकालिक निगरानी आवश्यक होगी।