बॉम्बे हाइ कोर्ट के आदेश के बाद बीएमसी ने लैंडफ़िल की गंध को नियंत्रित करने के लिये कई उपाय लागू किए, जिससे जनवरी‑जून 2026 में शिकायतों की संख्या घट गई। यह गिरावट शहरी कचरा प्रबंधन और पर्यावरणीय सुरक्षा के लिये एक सकारात्मक संकेत है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- बीएमसी द्वारा लागू किए गए कवर, मिट्टी और मिस्टिंग उपायों से गंध शिकायतें घटीं
- हरियाली और ट्री प्लांटेशन ने स्थानीय हवा को शुद्ध किया, पर मेथेन उत्सर्जन अभी भी चुनौती है
- भविष्य की योजना में वेस्ट‑टू‑एनर्जी और बायोमैथेन प्लांट शामिल हैं
बॉम्बे उच्च न्यायालय ने इस साल की शुरुआत में कंजूरमार्ग लैंडफ़िल की लगातार बदबू को रोकने हेतु एक निगरानी समिति बनाने और त्वरित सुधारात्मक कदम उठाने का निर्देश दिया। इस आदेश के बाद बृहन्नगर नगरपालिका (बीएमसी) ने कई तकनीकी उपाय लागू किए, जिसके परिणामस्वरूप जनवरी से जून 2026 तक गंध संबंधी शिकायतों में उल्लेखनीय कमी आई। जनवरी में 555 शिकायतें दर्ज हुईं, जबकि जुलाई में अभी तक कोई शिकायत नहीं आई, हालांकि इस अवधि में भारी मानसून भी आया।
लैंडफ़िल की वर्तमान स्थिति
मुंबई के पूर्वी छोर पर स्थित 144 हेक्टेयर का कंजूरमार्ग लैंडफ़िल प्रतिदिन लगभग 6,100 मीट्रिक टन कचरा प्राप्त करता है, जो शहर के कुल कचरे का 86 % है। 2011 में संचालन शुरू होने के बाद से इस स्थल पर लगभग 1.89 करोड़ मीट्रिक टन कचरा जमा हो चुका है, और कचरा ढेर 40‑50 मीटर ऊँचे हैं। इस बड़े पैमाने के डम्पिंग के कारण निकटवर्ती कन्नामवार नगर के निवासियों को लगातार बदबू और श्वसन संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता आया।
बीएमसी द्वारा लागू किए गए उपाय
डिप्टी नगरपालिका कमिश्नर (सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट) किरण दिघवकर ने बताया कि लैंडफ़िल के खुले ढेरों को मिट्टी से ढककर हवा के संपर्क में आने से रोका गया है। साथ ही, मिस्टिंग सिस्टम के माध्यम से गंध‑न्यूट्रलाइज़िंग रसायन और एंजाइम्स को छिड़का जा रहा है। अतिरिक्त रूप से, टार्पामेटिक कवर को बायोरिएक्टर सेल्स पर स्थापित किया गया है, जिससे गैसों का मुक्त होना कम हो रहा है।
हरियाली के प्रभाव और भविष्य की चुनौतियां
निगरानी समिति के एक सदस्य ने बताया कि पिछले डेढ़ महीने में 16,000 से अधिक पेड़ और पौधे लगाए गए हैं, और लक्ष्य 25,000 तक पहुँचने का है। ये हरियाली बफ़र हवा की गति को धीमा कर गंध को बिखरने से रोकता है, लेकिन मेथेन, हाइड्रोजन सल्फाइड और अन्य विषाक्त गैसों का मूल कारण नहीं बदलता। जीवविज्ञानी प्रकाश राय ने कहा, “लैंडफ़िल गैसों को दीर्घकालिक नियंत्रित करने के लिये इंजीनियरिंग समाधान आवश्यक हैं।” स्थानीय निवासी संजय येल्वे ने चेतावनी दी कि गंध घटने के बावजूद मेथेन जारी रहना पर्यावरणीय जोखिम बन कर बना रहेगा।
लंबी अवधि की रणनीति
बीएमसी ने कहा कि लैंडफ़िल को बंद करना व्यावहारिक नहीं है, क्योंकि मुंबई जैसी भूमि‑संकटग्रस्त शहर में नई 100‑हेक्टेयर साइट ढूँढना असंभव है। दीर्घकालिक योजना में दैनिक कचरे को संसाधित करने के लिये वेस्ट‑टू‑एनर्जी प्लांट और गीले कचरे के उपचार हेतु बायोमैथेन सुविधा स्थापित करने की दिशा में काम चल रहा है। ये कदम न केवल गंध को कम करेंगे, बल्कि मेथेन के उपयोग को ऊर्जा उत्पादन में बदलने से कार्बन फुटप्रिंट को भी घटाएंगे।