तीरुचि शहर में प्रतिदिन लगभग 470 टन कचरा उत्पन्न होता है, जिसमें 70% कचरा स्रोत ही अलग किया जा रहा है। नगर निगम ने निजी एजेंसी को संग्रह, वर्गीकरण और पुनःप्रसंस्करण सौंपा है और उल्लंघन पर दंड की सख्त चेतावनी दी है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- तीरुचि में प्रतिदिन 470 टन कचरा उत्पन्न होता है
- कचरे का 70% स्रोत पर ही अलग किया जा रहा है
- नियम उल्लंघन पर सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियमों के तहत दंड लगाया जाएगा
तीरुचि नगर निगम ने शहरी स्वच्छता को सुदृढ़ करने के लिए स्रोत पर ही कचरा अलग‑अलग करने की प्रक्रिया को तेज़ किया है। यह कदम 65 वार्डों में रहने वाले लाखों निवासियों, व्यावसायिक संस्थानों और अस्पतालों को सीधे प्रभावित करेगा।
प्रमुख पहल
नगर निगम ने सभी वार्डों में कचरा संग्रह, वर्गीकरण, परिवहन और प्रक्रिया को एक निजी एजेंसी को आउटसोर्स किया है। यह एजेंसी न केवल कचरे को एकत्र करती है, बल्कि उसे गीले, सूखे, स्वच्छता और विशेष देखभाल के चार वर्गों में विभाजित करती है, जिससे पुनर्चक्रण और कम्पोस्टिंग की दक्षता बढ़ती है।
वर्गीकरण और प्रबंधन
गीला कचरा—रसोई और खाद्य अवशेष—को कम्पोस्ट करने के लिए निर्धारित किया गया है, जबकि प्लास्टिक, कागज, धातु और काँच जैसे सूखे कचरे को अरीयामंगलम के आगामी ऑटोमेटेड मैटेरियल रिकवरी फ़ैक्ट्री में भेजा जाएगा। स्वच्छता कचरा में इस्तेमाल किए गए डायपर और सैनीटरी पैड शामिल हैं, जबकि विशेष देखभाल कचरे में पेंट के डिब्बे, बल्ब, पारा वाले थर्मामीटर और दवाएँ शामिल हैं।
पिछली पृष्ठभूमि
भारत में शहरी कचरा प्रबंधन की चुनौतियाँ कई दशकों से जारी हैं; कई बड़े शहरों में कचरा निपटान की क्षमता सीमित है और अनियंत्रित कूड़ेदान अक्सर जल और वायु प्रदूषण का कारण बनते हैं। तीरुचि में स्थापित RRR (Reduce, Reuse, Recycle) केन्द्रों ने नागरिकों को पुनर्चक्रण योग्य सामग्री अलग‑अलग जमा करने के लिए प्रेरित किया है, जिससे स्रोत विभाजन में सतत सुधार दिखा है।
भविष्य के कदम
नगर निगम ने कई जागरूकता अभियानों की योजना बनाई है, जिसमें स्थानीय वॉलेट एसोसिएशन, छात्र समूह और स्वयंसेवकों को शामिल किया जाएगा। साथ ही, नियमित निरीक्षण के लिए स्वच्छता निरीक्षकों को निर्देशित किया गया है और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियमों के तहत बार‑बार उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर कठोर दंड लागू किया जाएगा। यह व्यापक रणनीति न केवल कचरे की मात्रा घटाने में मदद करेगी, बल्कि तीरुचि को भारत के मॉडल सिटी के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।