भारत के कई टियर‑II और टियर‑III जिलों में घरों ने छत पर सौर पैनलों को अपना लिया है, जिससे बड़े मेट्रोपॉलिटन शहर पीछे रह गए हैं। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना ने अब तक 36.3 लाख सिस्टम स्थापित कर 44 लाख परिवारों को लाभ पहुंचाया है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- टियर‑II/III शहरों में छत सौर अपनाने की दर मेट्रो में नहीं है
- प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना ने 36.3 लाख यूनिट स्थापित कर 44 लाख घरों को लाभ दिया
- अल्प आय वाले वर्ग के लिए यूटा मॉडल और समूह आवास पर फोकस बढ़ रहा है
भारत में ऊर्जा संक्रमण का नया अध्याय शुरू हो चुका है। लखनऊ, नागपुर, सूरत, वाराणसी और एरनाकुलम जैसे मध्यम आकार के जिले अब राष्ट्रीय स्तर पर छत सौर अपनाने के शीर्ष 50 में शामिल हैं, जबकि दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु जैसी मेट्रो शहरें शीर्ष 100 में भी नहीं दिख रहीं। इस बदलाव का मुख्य कारण प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना है, जो फरवरी 2024 में लॉन्च हुई और 2027 तक जारी रहेगी।
योजना की प्रमुख विशेषताएँ और उपलब्धियाँ
सरकार ने इस योजना के तहत 75,021 करोड़ रुपये की बजट आवंटन किया, जिसमें से 25,000 करोड़ रुपये सब्सिडी के रूप में वितरित हो चुके हैं। 3 kW तक के छत सौर सिस्टम पर केंद्र सरकार 78,000 रुपये की सब्सिडी देती है, और कई राज्यों ने अतिरिक्त प्रोत्साहन प्रदान किया है। अब तक 36.3 लाख यूनिट स्थापित हो चुके हैं, जिससे 44.1 लाख घरों को निरंतर मुफ्त बिजली मिल रही है।
भौगोलिक और सामाजिक पैटर्न
गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, केरल और असम जैसे राज्य इस पहल में अग्रणी हैं। इन राज्यों ने डिस्कॉम‑और जिला‑स्तरीय टीमों के माध्यम से जागरूकता बढ़ाई, जिससे 60 % से अधिक इंस्टॉलेशन 3‑4 kW वर्ग में रहे। विशेष रूप से उत्तर प्रदेश और केरल ने प्रभावी आउटरीच प्रोग्राम चलाकर उपभोक्ताओं को आकर्षित किया।
शहरी समूह आवास और कम आय वाले वर्ग पर फोकस
जबकि स्वतंत्र घरों ने सबसे अधिक लाभ उठाया, अब सरकार समूह आवास सोसाइटीज़ को भी योजना में शामिल करने पर काम कर रही है। एक ही छत सौर प्रणाली कई घरों और सामुदायिक सुविधाओं की बिजली जरूरतों को पूरा कर सकती है। साथ ही, यूटा (Utility‑Led Aggregation) मॉडल को अपनाकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को सौर ऊर्जा से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। आंध्र प्रदेश, ओडिशा, तेलंगाना, बिहार, केरल, जम्मू‑कश्मीर, त्रिपुरा, राजस्थान, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, महाराष्ट्र और दिल्ली इस मॉडल को लागू कर रहे हैं, जिसका लक्ष्य 30 लाख घरों तक पहुंचना है।
आगे का मार्ग और संभावित प्रभाव
यदि यह गति बनी रही, तो भारत 2030 तक अपने नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण कदम उठाएगा। छत सौर ऊर्जा न केवल बिलों को शून्य करने में मदद करेगी, बल्कि अतिरिक्त उत्पन्न ऊर्जा को ग्रिड में फीड करके राष्ट्रीय पावर सिस्टम की स्थिरता भी बढ़ाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि शहर‑से‑शहर की प्रतिस्पर्धा, स्थानीय प्रशासन की सक्रियता और निजी क्षेत्र की भागीदारी इस परिवर्तन को तेज़ कर सकती है।