केन्द्र ने मुडूमलई टाइगर रिज़र्व की सीमा के चारों ओर 852.151 वर्ग किलोमीटर को इको‑सेंसिटिव ज़ोन (ESZ) घोषित किया है। इस क्षेत्र के लिए ज़ोनल मास्टर प्लान तैयार करने हेतु आदिवासी, किसान, रिसॉर्ट मालिक और सफ़ारी ऑपरेटरों के साथ कई परामर्श बैठकें आयोजित की गईं।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- 852.151 वर्ग किमी को ESZ के रूप में घोषित किया गया
- स्थानीय समुदायों से दो दिन की व्यापक परामर्श प्रक्रिया
- जोनल मास्टर प्लान में स्थानीय सुझावों को शामिल किया जाएगा
मुडूमलई टाइगर रिज़र्व (MTR) के निकट 0 से 33.65 किमी की सीमा में कुल 852.151 वर्ग किलोमीटर को इको‑सेंसिटिव ज़ोन (ESZ) के रूप में आधिकारिक रूप से घोषित किया गया है। यह घोषणा 13 दिसंबर 2019 को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा की गई थी, जिसका उद्देश्य जैव विविधता की सुरक्षा, वन्यजीवों के आवास को संरक्षित करना और सतत विकास को प्रोत्साहित करना है।
परामर्श प्रक्रिया की रूपरेखा
निलगिरी और गुदालूर वन विभागों ने 10 और 11 जुलाई 2026 को कोयंबटूर के चोक्कनली जनजातीय गाँव में दो प्रमुख बैठकों का आयोजन किया। पहला सत्र आदिवासी और किसान प्रतिनिधियों के साथ चोक्कनली समुदाय हॉल में हुआ, जबकि दूसरा सत्र सफ़ारी वाहन ऑपरेटरों और रिसॉर्ट मालिकों के साथ थेप्पाकडु कॉन्फ़्रेंस हॉल में आयोजित किया गया। इन बैठकों का संचालन वन विभाग और सिगुर नेचर ट्रस्ट ने मिलकर किया।
स्थानीय आवाज़ों का महत्व
बैठक में उपस्थित ग्रामीणों ने अपने पारम्परिक ज्ञान, भूमि उपयोग की आदतें और पर्यटन से जुड़ी आर्थिक चिंताएँ साझा कीं। कई किसान ने वन‑आधारित कृषि के लिए वैकल्पिक आय स्रोतों की आवश्यकता पर बल दिया, जबकि आदिवासी समुदाय ने अभयारण्य के भीतर अपनी सांस्कृतिक स्थलांतरों की सुरक्षा की मांग की। रिसॉर्ट मालिकों ने इको‑टूरिज़्म को बढ़ावा देने के लिए पर्यावरण‑अनुकूल नियमों की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
जोनल मास्टर प्लान का भविष्य
परामर्श के दौरान संकलित सभी सुझावों को दर्ज किया गया और आगे की योजना निर्माण में उपयोग किया जाएगा। वन विभाग ने कहा कि यह मास्टर प्लान दो‑तीन साल में तैयार कर संसद को प्रस्तुत किया जाएगा, जिसमें भूमि‑उपयोग प्रतिबंध, मानव‑वन्यजीव टकराव को कम करने के उपाय और स्थानीय रोजगार सृजन के लिए प्रोत्साहन पैकेज शामिल होंगे।
प्रभाव और चुनौतियाँ
ESZ की प्रभावी कार्यान्वयन से मुडूमलई के बाघ और अन्य संकटग्रस्त प्रजातियों के आवास को संरक्षित करने में मदद मिल सकती है, साथ ही सतत पर्यटन मॉडल को भी सुदृढ़ किया जा सकता है। हालांकि, स्थानीय समुदायों की आजीविका पर संभावित प्रतिबंधों को लेकर विरोध की संभावना भी बनी हुई है, जिससे नीति‑निर्माताओं को संतुलित समाधान निकालना आवश्यक होगा।