फ़िनलैंड‑स्थित गैर‑लाभकारी संस्था CREA ने 300 किमी के भीतर 37 कोयला प्लांटों का अध्ययन किया। रिपोर्ट से पता चलता है कि श्रेणी‑C प्लांटों की छूट ने भारत की बड़ी भागीदारी को बढ़ाया है, जिससे दिल्ली के वायु गुणवत्ता पर गंभीर असर पड़ रहा है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- दिल्ली‑एनसीआर के 300 किमी में 37 कोयला इकाइयों में से 20 ने सुरक्षित सीमा से अधिक SO₂ निकास किया।
- श्रेणी‑C प्लांटों को FGD स्थापित करने से छूट दी गई, जिससे 81% कुल SO₂ उत्सर्जन इन प्लांटों से आया।
- केवल दो प्लांटों – दादरी और महात्मा गांधी – ने FGD के साथ न्यूनतम उत्सर्जन दर्ज किया।
फ़िनलैंड‑स्थित गैर‑लाभकारी संस्था Centre for Research on Energy and Clean Air (CREA) ने 14 जुलाई को एक विस्तृत अध्ययन प्रकाशित किया, जिसमें दिल्ली‑एनसीआर के 300 किमी दायरे में स्थित 37 कोयला‑आधारित विद्युत संयंत्रों की जांच की गई। इस अध्ययन में सामने आया कि 20 संयंत्रों ने पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से अधिक सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) निकास किया है।
पृष्ठभूमि और नियामक ढाँचा
2015 में भारत ने सभी कोयला‑आधारित पावर प्लांटों को दो साल के भीतर फ्ल्यू गैस डीसल्फराइज़ेशन (FGD) प्रणाली स्थापित करने का आदेश दिया था। हालांकि, इस आदेश को चार बार स्थगित किया गया और 2021 में श्रेणी‑A, B, C के आधार पर अलग‑अलग समय‑सीमा निर्धारित की गई। श्रेणी‑A (दिल्ली‑एनसीआर और मिलियन‑प्लस शहरों के निकट) को 2027 तक अनुपालन करना अनिवार्य है, जबकि श्रेणी‑C (देश के अधिकांश क्षेत्रों) को पूरी तरह से छूट दी गई।
मुख्य निष्कर्ष
CREA के आंकड़ों के अनुसार, 154 किलोटन (किलोटन) SO₂ का अनुमानित वार्षिक उत्सर्जन इन 37 इकाइयों से उत्पन्न होता है, जिसमें 90% उत्सर्जन उन प्लांटों से है जिनमें FGD नहीं है। विशेष रूप से, श्रेणी‑C प्लांटों ने कुल SO₂ का 81% योगदान दिया। बड़े प्रदूषकों में राजपुरा, तालवंडी साबो, राजीव गांधी, गुरु हरगोबिंद, हार्दुआंगज और रोपर शामिल हैं, जिनमें से अधिकांश ने FGD प्रणाली नहीं लगाई है।
उदाहरणात्मक प्रदर्शन
दादरी और महात्मा गांधी थर्मल पावर प्लांट, दोनों में FGD स्थापित है, और उन्होंने सबसे कम SO₂ निकास दर्ज किया। जबकि राजपुरा के दो यूनिट्स ने क्रमशः 20,851 टन और 22,690 टन SO₂ उत्सर्जित किया, जो अन्य कई अनियंत्रित संयंत्रों के संयुक्त उत्सर्जन से अधिक है। यह स्पष्ट करता है कि FGD प्रणाली की अनुपस्थिति वायु प्रदूषण को कैसे बढ़ा देती है।
वैश्विक संदर्भ और आगे की चुनौतियाँ
भारत के बाद सल्फर डाइऑक्साइड के सबसे बड़े उत्सर्जक दक्षिण अफ्रीका, तुर्की, सऊदी अरब और चीन हैं। हालांकि चीन की कोयला क्षमता भारत से चार गुना अधिक है, भारत का SO₂ उत्सर्जन लगभग तीन गुना अधिक है, क्योंकि केवल 12% भारतीय प्लांटों में FGD स्थापित है। यह अंतर नीति‑निर्धारण, नियामक कार्यान्वयन और तकनीकी अपनाने में अंतर को दर्शाता है।
रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि श्रेणी‑C प्लांटों को FGD स्थापित करने की अनिवार्यता नहीं दी गई, तो दिल्ली की हवा की गुणवत्ता में सुधार असंभव रहेगा। विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि सरकार को समय‑सीमा को पुनः विचार करना चाहिए और सभी कोयला‑आधारित प्लांटों में FGD को अनिवार्य करना चाहिए, ताकि राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय वायु मानकों को पूरा किया जा सके।