दिल्ली सरकार ने ‘नया सफर योजना’ के तहत पुराने ट्रकों और बसों को हटाने के लिए 100% मोटर वाहन कर छूट और पंजीकरण शुल्क में छूट जैसी आर्थिक प्रोत्साहन पेश किए हैं। यह कदम बीएस‑VI एवं इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर परिवर्तन को तेज़ करेगा और शहर की वायु गुणवत्ता में सुधार लाएगा।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • 10 साल के लिए नई वाहनों पर 100% मोटर वाहन कर छूट
  • पुरानी बीएस‑IV ट्रकों और बसों के लिए 50% कर छूट
  • इलेक्ट्रिक लाइट गूड्स वीकिल्स और BS‑VI बसों को प्रमोट करने हेतु विशेष प्रावधान

दिल्ली ने ‘नया सफर योजना’ के तहत वाहनों के उत्सर्जन को घटाने और स्वच्छ ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए एक व्यापक प्रोत्साहन पैकेज पेश किया है। यह पहल राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में पुरानी ट्रकों और बसों को चरणबद्ध तरीके से बाहर निकालते हुए, बीएस‑VI मानकों और इलेक्ट्रिक ट्रकों को अपनाने को प्रोत्साहित करती है।

योजना का मूल उद्देश्य

बीएस‑IV मानकों वाले वाहन, जो अप्रैल 2017 से मार्च 2020 तक पूरे भारत में लागू थे, अब बीएस‑VI मानकों के साथ प्रतिस्पर्धा नहीं कर पा रहे हैं। दिल्ली सरकार का लक्ष्य इन पुराने वाहनों को स्क्रैप कर, नई, कम उत्सर्जन वाली या शून्य‑उत्सर्जन वाली गाड़ियों की ओर बदलाव को प्रेरित करना है, जिससे शहर में धुंधली हवा और स्वास्थ्य जोखिम कम हों।

प्रदान की जाने वाली रियायतें

योजना के तहत, योग्य नई वाहनों पर 10 वर्षों तक 100% मोटर वाहन कर छूट दी जाएगी, जबकि उपयोग किए गए बीएस‑IV ट्रकों और बसों के लिए 50% कर छूट उपलब्ध होगी। इसके अतिरिक्त पंजीकरण शुल्क में छूट, बकाया रोड टैक्स और फिटनेस पेनल्टी का माफ़ी भी दी जाएगी। इन आर्थिक प्रोत्साहनों के साथ, केंद्र सरकार द्वारा प्रदान किए जा रहे ब्याज सब्सिडी, ईंधन वाउचर और एक‑बार के ई‑वी लाभों को भी मिलाकर, कुल मिलाकर लगभग 2.07 लाख निजी ट्रक‑बस मालिकों को लाभ पहुंचाने का अनुमान है।

वित्तीय पहलू और कार्यान्वयन

इस योजना का कुल बजट लगभग ₹9,585 करोड़ है, जिसमें केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (NCRPB) के माध्यम से ₹5,041 करोड़ का योगदान दिया है। सभी लाभों को डिजिटल ‘नया सफर पोर्टल’ के माध्यम से रीयल‑टाइम सत्यापन, स्वचालित disbursal और अंत‑तक निगरानी के साथ प्रदान किया जाएगा। दो साल की अवधि में पात्र लाभार्थियों को पंजीकरण करने का अवसर मिलेगा।

भविष्य की दिशा

विशेष प्रावधानों के तहत, इस योजना के तहत खरीदे जाने वाले हल्के माल वाहन (LGV) को इलेक्ट्रिक होना अनिवार्य किया गया है, जबकि बसों को बीएस‑VI मानक, सीएनजी या इलेक्ट्रिक विकल्पों में से चुनना होगा। यह न केवल प्रदूषण कम करने में मदद करेगा, बल्कि दिल्ली के दीर्घकालिक आर्थिक विकास और सतत परिवहन प्रणाली के निर्माण में भी योगदान देगा।

परिवहन विभाग ने इस योजना के लिए आवश्यक नोटिफिकेशन जारी करने और मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करने की जिम्मेदारी ली है, जिससे सभी हितधारकों के बीच सुगम कार्यान्वयन सुनिश्चित हो सके।