कोयंबटूर के के.जी. चावड़ी के पास एक अकेले जंगली हाथी ने 75 वर्षीय नटराज को मार दिया। वह शौचालय की आवश्यकता से पास के नाले तक गया था, जब अचानक वह शिकार बन गया।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • कोयंबटूर में 75 वर्षीय नटराज जंगली हाथी के हमले में मारे गए
  • हाथी ने अकेले ही हमला किया, जिससे मानव-वन्यजीव टकराव की गंभीरता उजागर हुई
  • फॉरेस्ट विभाग ने घटना की पूरी जांच शुरू कर दी है

कोयंबटूर, तमिलनाडु – मंगलवार की सुबह 75 वर्षीय नटराज, पुधुपथी गाँव के निवासी, केजी चावड़ी के पास स्थित एक छोटे नाले पर शौचालय की जरूरत पूरी करने गए थे। उसी समय एक अकेला जंगली हाथी अचानक प्रकट हुआ और बिना किसी चेतावनी के उस पर हमला कर गया। नटराज को तुरंत फॉरेस्ट विभाग के कर्मियों द्वारा बचाया गया और कोयंबटूर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया, परंतु वह रास्ते में ही अपनी चोटों के कारण दम तोड़ गया।

पृष्ठभूमि और मानव‑हाथी टकराव

तमिलनाडु में पिछले दो दशकों में मानव‑हाथी टकराव की घटनाएँ बढ़ती जा रही हैं। वन विभाग के आँकड़े बताते हैं कि 2010‑2025 के बीच राज्य में 150 से अधिक मानव मृत्यु के मामलों की रिपोर्ट हुई है। मुख्य कारणों में वन क्षेत्रों का शहरीकरण, बागवानी की सीमाओं का विस्तार, और प्राकृतिक आवासों का क्षरण शामिल है। कोयंबटूर जिले में भी कई बार हाथी गांवों में प्रवेश कर फसलें तोड़ते और कभी‑कभी लोगों को चोट पहुँचाते रहे हैं।

फॉरेस्ट विभाग की प्रतिक्रिया

घटना के बाद फॉरेस्ट विभाग ने तुरंत क्षेत्र में अतिरिक्त गश्त बढ़ा दी और प्रभावित इलाके को सुरक्षित करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक बाड़ और ध्वनि संकेतक स्थापित करने की योजना बनाई है। विभाग के अधिकारी रवि कुमार ने कहा, “हम इस घटना की विस्तृत जांच कर रहे हैं और यह निर्धारित करेंगे कि क्या हाथी का व्यवहार किसी विशेष कारण से प्रेरित था, जैसे कि भोजन की कमी या मानवीय व्यवधान।” साथ ही, स्थानीय प्रशासन को भी ग्रामीणों को वन्यजीव सुरक्षा के बारे में जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं।

स्थानीय प्रतिक्रिया और भविष्य की दिशा

नटराज के परिवार ने इस दुखद घटना को “अकल्पनीय” कहा और फॉरेस्ट विभाग से हाथी के प्रवास को नियंत्रित करने की कड़ी मांग की। सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. अनीता राव ने कहा, “हाथी के हमले को केवल एक व्यक्तिगत दुर्भाग्य नहीं, बल्कि एक प्रणालीगत समस्या के रूप में देखना चाहिए। हमें वन्यजीव corridors को पुनर्स्थापित करना होगा और ग्रामीणों को वैकल्पिक जल स्रोत प्रदान करने चाहिए, ताकि ऐसी घटनाएँ दोबारा न हों।”

निष्कर्ष

नटराज की मृत्यु ने मानव‑वन्यजीव सहअस्तित्व के मुद्दे को फिर से उजागर किया है। यह घटना न केवल स्थानीय प्रशासन बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर वन्यजीव संरक्षण नीतियों में सुधार की आवश्यकता को रेखांकित करती है। भविष्य में प्रभावी निगरानी, सामुदायिक भागीदारी, और वैज्ञानिक आधार पर तैयार किए गए समाधान ही इस प्रकार के घातक टकराव को रोकने में सहायक हो सकते हैं।