पुडुचेरी के जिपमेर संस्थान ने एक सफल मल्टी-ऑर्गन ट्रांसप्लांट प्रक्रिया को अंजाम देकर तीन मरीजों की जान बचाई है। सड़क दुर्घटना में ब्रेन डेड घोषित किए गए एक युवक के अंगों का दान किया गया।
मुख्य बातें
- जिपमेर ने 32 वर्षीय युवक के अंगों का सफल प्रत्यारोपण किया।
- दाता के लिवर और किडनी से तीन मरीजों की जान बचाई गई।
- दाता की कॉर्निया का उपयोग दृष्टि बहाल करने के लिए किया जाएगा।
- यह प्रक्रिया 'मानव अंग और ऊतक प्रत्यारोपण अधिनियम (THOTA), 1994' के तहत की गई।
पुडुचेरी स्थित जवाहरलाल संस्थान स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान (Jipmer) ने चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। संस्थान ने एक 32 वर्षीय व्यक्ति के ब्रेन स्टैम डेथ (Brain Stem Death) के बाद सफलतापूर्वक मल्टी-ऑर्गन डोनेशन की प्रक्रिया को पूरा किया, जिससे तीन अलग-अलग मरीजों को नया जीवन मिला है।
घटनाक्रम के अनुसार, नेवेली (कुड्डालोर जिला) निवासी राजन को 29 जुलाई को एक सड़क दुर्घटना में गंभीर सिर की चोट लगने के बाद जिपमेर में भर्ती कराया गया था। संस्थान की मल्टीडिसीप्लिनरी टीम द्वारा गहन उपचार के बावजूद, उनकी मस्तिष्क की चोट अपूरणीय पाई गई। अंततः, ब्रेन स्टैम डेथ सर्टिफिकेशन बोर्ड द्वारा उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया।
क्यों महत्वपूर्ण है यह घटना?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत में अंगों की मांग और उपलब्धता के बीच एक बहुत बड़ा अंतर है। इस प्रकार के सफल मामले न केवल चिकित्सा तकनीक की दक्षता को दर्शाते हैं, बल्कि समाज में अंग दान के प्रति जागरूकता फैलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
अंग दान मृत्यु के बाद भी जीवन को निरंतर बनाए रखने का सबसे मानवीय और महान तरीका है।
दाता के परिवार की सहमति के बाद, उनके लिवर और किडनी को स्थापित अंग आवंटन प्रणाली के माध्यम से उन मरीजों को दिया गया जो एंड-स्टेज ऑर्गन फेलियर से जूझ रहे थे। इसके अतिरिक्त, दाता की दो कॉर्निया का उपयोग दृष्टिहीन मरीजों की आंखों की रोशनी लौटाने के लिए किया जाएगा।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में अंग प्रत्यारोपण को विनियमित करने के लिए Transplantation of Human Organs and Tissues Act (THOTA), 1994 लागू किया गया था। यह कानून अंगों के अवैध व्यापार को रोकने और व्यवस्थित तरीके से दान प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया था।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. ब्रेन डेथ और कोमा में क्या अंतर है?
ब्रेन डेथ एक अपरिवर्तनीय स्थिति है जहां मस्तिष्क पूरी तरह से काम करना बंद कर देता है, जबकि कोमा में मस्तिष्क की कुछ गतिविधियां बनी रह सकती हैं।
2. अंग दान के लिए कौन अनुमति दे सकता है?
अंग दान के लिए मृतक के परिवार की कानूनी सहमति अनिवार्य है।