तमिलनाडु के इरोड जिले में 10 अगस्त को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस मनाया जाएगा, जिसके तहत 6.6 लाख से अधिक बच्चों और महिलाओं को अल्बेंडाजोल की गोलियां दी जाएंगी। यह अभियान मिट्टी से फैलने वाले संक्रमणों को रोकने के लिए सरकार द्वारा आयोजित किया जा रहा है।
मुख्य बातें
- 10 अगस्त को इरोड जिले में व्यापक कृमि मुक्ति अभियान।
- 6.6 लाख से अधिक लाभार्थी (बच्चे और महिलाएं) लाभान्वित होंगे।
- अंगणवाड़ी केंद्रों और स्कूलों के माध्यम से वितरण किया जाएगा।
- गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को इस अभियान से बाहर रखा गया है।
तमिलनाडु के इरोड जिले में स्वास्थ्य प्रशासन ने एक बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियान की घोषणा की है। आगामी 10 अगस्त को 'राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस' के अवसर पर जिले के 6.6 लाख से अधिक पात्र लाभार्थियों को अल्बेंडाजोल (Albendazole) की गोलियां वितरित की जाएंगी। जिला कलेक्टर एस. कंडसामी के अनुसार, यह पहल राज्य सरकार के निर्देशों के तहत मिट्टी से होने वाले कृमि संक्रमणों (Soil-transmitted worm infections) को रोकने के लिए की जा रही है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के अनुसार, भारत की लगभग 24% आबादी इस तरह के संक्रमणों से प्रभावित है। तमिलनाडु में यह दर 5-10% है, लेकिन जनजातीय समुदायों में यह आंकड़ा बढ़कर 39% तक पहुंच जाता है। राउंडवर्म, हुकवर्म और व्हिपवर्म जैसे परजीवी अक्सर पेट में दर्द, दस्त, भूख की कमी और कमजोरी का कारण बनते हैं, जो लंबे समय में कुपोषण और एनीमिया का रूप ले सकते हैं।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता और जागरूकता की कमी के कारण कृमि संक्रमण बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास में बड़ी बाधा बनते हैं। समय पर कृमि मुक्ति न केवल स्वास्थ्य सुधारती है, बल्कि बच्चों की संज्ञानात्मक क्षमता (Cognitive ability) को भी बनाए रखती है।
कृमि मुक्ति अभियान केवल दवा वितरण नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ी को कुपोषण के चक्र से बाहर निकालने का एक महत्वपूर्ण कदम है।
इरोड में यह वितरण अभियान 2,080 आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से 5 साल से कम उम्र के बच्चों को, और सरकारी व निजी स्कूलों/कॉलेजों के माध्यम से 19 वर्ष तक के छात्रों को दिया जाएगा। इसमें 5,44,350 छात्र और 1,21,715 महिलाएं (आयु 20-30 वर्ष) शामिल होंगी। 1-2 वर्ष के बच्चों को 200 मिलीग्राम और 2-19 वर्ष के बच्चों व महिलाओं को 400 मिलीग्राम की खुराक दी जाएगी।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में कृमि मुक्ति अभियान (Deworming Campaign) दशकों से सार्वजनिक स्वास्थ्य का एक अनिवार्य हिस्सा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों में एनीमिया और कुपोषण की दर को कम करना है, जो अक्सर पेट के कीड़ों के कारण होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: यदि कोई 10 अगस्त को दवा नहीं ले पाता है तो क्या होगा?
उत्तर: प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जो लोग 10 अगस्त को चूक जाएंगे, उन्हें 17 अगस्त को दवा दी जाएगी।
प्रश्न 2: क्या गर्भवती महिलाएं यह दवा ले सकती हैं?
उत्तर: नहीं, सुरक्षा कारणों से गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को इस अभियान से बाहर रखा गया है।