अमेरिकी श्रम विभाग ने H-1B वीज़ा प्रणाली में संभावित धोखाधड़ी की जाँच के लिए एक व्यापक जांच शुरू की है। प्रमुख आईटी सेवा प्रदाता कॉग्निज़ेंट सहित कई कंपनियों को इस जांच में शामिल किया गया है। यह कदम अवैध श्रम प्रथाओं और मानव तस्करी को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है।
वॉशिंगटन — 8 जुलाई को अमेरिकी श्रम विभाग ने H-1B वीज़ा धोखाधड़ी पर एक बड़े पैमाने की जांच की घोषणा की। इस जांच के मुख्य बिंदु में आईटी सेवाओं की दिग्गज कंपनी कॉग्निज़ेंट को शामिल किया गया है, जिससे इस क्षेत्र में विदेशी कुशल कर्मियों की भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठे हैं।
H-1B वीज़ा प्रणाली का अवलोकन
H-1B एक गैर-आप्रवासी कार्य वीज़ा है, जो अमेरिकी नियोक्ताओं को विशेष तकनीकी, इंजीनियरिंग, स्वास्थ्य और शैक्षणिक क्षेत्रों में विदेशी विशेषज्ञों को नियुक्त करने की अनुमति देता है। प्रारम्भिक अवधि तीन वर्ष की होती है, जिसे कुल छह वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है। पिछले कुछ दशकों में तकनीकी सेक्टर ने इस वीज़ा का सबसे बड़ा उपयोगकर्ता बनकर 60‑70% नई आवेदनों को कब्जा किया है।
जांच के कारण और प्रमुख आरोप
लेबर डिपार्टमेंट के इंस्पेक्टर जनरल एंथोनी डी'एस्पोसिटो ने कहा, “धोखाधड़ी न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचाती है, बल्कि हिंसक अपराधों को भी बढ़ावा देती है।” उन्होंने यह भी बताया कि कई मामलों में विदेशी श्रमिकों को कार्टेल और ट्रांसनेशनल गैंग्स द्वारा शोषित किया जाता है, जिससे मानव तस्करी का खतरा बढ़ता है। इस परिप्रेक्ष्य में, जांच का उद्देश्य न केवल अमेरिकी सुरक्षा को पुनः स्थापित करना, बल्कि श्रम लागत को नियंत्रित करके “अमेरिका को अधिक किफ़ायती बनाना” भी है।
कॉग्निज़ेंट की स्थिति
कॉग्निज़ेंट, जो भारत में बड़ी संख्या में H-1B वीज़ा धारकों को नियुक्त करता है, को इस जांच में प्रमुख लक्ष्य माना गया है। कंपनी ने अभी तक आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी, पर उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यह जांच व्यापक रूप से आईटी आउटसोर्सिंग मॉडल को प्रभावित कर सकती है। यदि बड़ी अनियमितताएँ पाई गईं, तो कंपनियों को भारी जुर्माने और संभावित प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है।
भविष्य की संभावनाएँ और नीतिगत बदलाव
जांच के परिणामों के आधार पर अमेरिकी कांग्रेस और प्रशासन ह-1बी वीज़ा की पात्रता मानदंडों में संशोधन कर सकते हैं। संभावित सुधारों में अधिक कड़े दस्तावेज़ीकरण, रोजगार की वास्तविकता की जाँच और टॉप-टैलेंट को प्राथमिकता देना शामिल हो सकता है। यह बदलाव न केवल अमेरिकी कंपनियों, बल्कि भारत जैसे प्रमुख श्रमिक निर्यातकों के लिए भी महत्वपूर्ण प्रभाव डालेंगे।
निष्कर्ष
जैसे-जैसे वैश्विक तकनीकी प्रतिभा पर प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है, H-1B वीज़ा प्रणाली की पारदर्शिता और वैधता पर ध्यान देना अनिवार्य हो गया है। इस जांच से न केवल धोखाधड़ी वाले नेटवर्क को ध्वस्त करने की उम्मीद है, बल्कि वैध विदेशी श्रमिकों के अधिकारों की भी रक्षा होगी।