जर्मनी ने अमेरिकी टॉमहॉक क्रूज़ मिसाइलों की खरीद का सौदा किया, जिससे उसकी दीर्घ दूरी की हमले की क्षमता में अंतर भर जाएगा। यह कदम नाटो शिखर सम्मलेन के बाद आया और यूरोपीय रक्षा प्रणाली के विकास को भी तेज करेगा।

जर्मनी ने अमेरिकी टॉमहॉक क्रूज़ मिसाइलों की खरीद के लिए आधिकारिक समझौता किया, यह घोषणा चांसलर फ्रेडरिक मेर्ज़ ने नाटो के अंकारा शिखर सम्मेलन के बाद की। संसद में अपने भाषण में उन्होंने बताया कि ये मिसाइलें जर्मनी की रक्षा क्षमताओं में मौजूद बड़े अंतर को पाटेंगी और यूरोप में स्वदेशी रक्षा प्रणाली के विकास को गति देंगी।

नाटो शिखर सम्मेलन और रणनीतिक पृष्ठभूमि

अंकारा में दो दिवसीय नाटो summit के दौरान, यूरोपीय सदस्य राष्ट्रों ने रूसी आक्रमण के बाद अपनी सामरिक स्थिति को पुनः परिभाषित करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। इस संदर्भ में, अमेरिका ने अपने प्रमुख सहयोगियों को उन्नत हथियार तकनीक प्रदान करने की इच्छा जताई, जिससे गठबंधन की सामूहिक सुरक्षा को सुदृढ़ किया जा सके। टॉमहॉक का चयन इस रणनीतिक दिशा-निर्देश का प्रत्यक्ष परिणाम है।

टॉमहॉक का तकनीकी विवरण

टॉमहॉक क्रूज़ मिसाइल 1980 के दशक से अमेरिकी सैन्य उपकरणों में शामिल है। यह लगभग 30 मीटर की ऊँचाई पर 1,600 किमी तक की दूरी तय कर सकती है, जिससे यह गहरी अंतरिक लक्ष्य तक सटीक प्रहार कर सकती है। इसकी कम-उच्चता उड़ान पथ और प्रिसीजन गाइडेंस प्रणाली इसे प्रतिरक्षा नेटवर्क के लिए पहचानना कठिन बनाती है। जर्मनी इस तकनीक को अपने मौजूदा टाइफ़ून लॉन्चर सिस्टम के साथ संयोजित करने की योजना बना रहा है।

जर्मनी की दीर्घ दूरी की रक्षा नीति

2023 से जर्मन सरकारें टॉमहॉक जैसे लंबी दूरी के हथियारों की खरीद के लिए प्रयासरत थीं, लेकिन अमेरिकी अनुमति की कमी के कारण प्रक्रिया रुकती रही। इस समझौते से जर्मनी को न केवल तुरंत रणनीतिक अंतर भरने का अवसर मिलेगा, बल्कि यूरोप में स्वदेशी मिसाइल प्रणाली के विकास को भी प्रोत्साहन मिलेगा। मेर्ज़ ने कहा कि इस कदम से यूरोप में अमेरिकी तकनीक पर निर्भरता घटेगी और स्थानीय उद्योग को नई दिशा मिलेगी।

भविष्य की संभावनाएँ और चुनौतियाँ

टॉमहॉक की डिलीवरी अगस्त में शुरू होने की उम्मीद है, जबकि जर्मनी को किस संख्या में मिसाइलें और लॉन्चर प्राप्त होंगे, यह अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। इस सौदे का प्रभाव यूरोपीय सुरक्षा संरचना पर गहरा होगा, क्योंकि यह नाटो के सामूहिक प्रतिरोध को मजबूत करेगा और संभावित रूप से रूस और चीन जैसी महाशक्तियों के साथ तनाव को बढ़ा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जर्मनी की इस कदम से यूरोप में रक्षा सहयोग का नया चरण शुरू होगा, जिसमें अमेरिकी तकनीक का उपयोग करके स्वदेशी नवाचार को प्रोत्साहन मिलेगा।