भारत और ऑस्ट्रेलिया ने मेलबर्न में 18 व्यापक समझौते किए, जिसमें सिविल परमाणु ऊर्जा, रक्षा, समुद्री सुरक्षा और महत्वपूर्ण खनिजों का सहयोग शामिल है। दोनों देश इस समझौते को इन्डो‑पैसिफिक में शांति, स्थिरता और नियम‑आधारित व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए एक रणनीतिक कदम मानते हैं।
मैलबर्न में आयोजित द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथोनी अल्बानेज़ ने 18 समझौतों पर हस्ताक्षर किया, जो सिविल परमाणु ऊर्जा, रक्षा, समुद्री सुरक्षा और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग को गहरा करेंगे। यह पैकेज दोनों देशों के बीच इन्डो‑पैसिफिक में एक स्थिर, शांति‑पूरक और नियम‑आधारित वातावरण स्थापित करने के लक्ष्य को प्रतिबिंबित करता है।
परमाणु ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों का नया युग
समझौतों में प्रमुख रूप से एक सिविल परमाणु ऊर्जा समझौता शामिल है, जिससे ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम की वाणिज्यिक आपूर्ति भारत के परमाणु ऊर्जा प्रोजेक्टों को सुदृढ़ करेगी। साथ ही, दोनों देशों ने एक ऑस्ट्रेलिया‑भारत साझेदारी की घोषणा की, जो साइबर, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी और आपूर्ति शृंखलाओं पर केंद्रित होगी, तथा एक महत्वपूर्ण खनिजों के कॉरिडोर की स्थापना की दिशा में काम करेगा। यह पहल न केवल ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाएगी, बल्कि जलवायु परिवर्तन से निपटने में भारत की स्वच्छ ऊर्जा रणनीति को भी गति देगी।
रक्षा और समुद्री सुरक्षा में रणनीतिक गहराई
डिफेंस और सुरक्षा सहयोग पर एक संयुक्त घोषणा, समुद्री सुरक्षा सहयोग रोडमैप, तथा भारतीय तटगश्ती और ऑस्ट्रेलिया की मेरिटाइम बॉर्डर कमांड के बीच समझौता, दोनों देशों की सामरिक तत्परता को नई ऊँचाइयों पर ले जाएगा। समझौतों में नौसैनिक निर्माण, शिप‑रिपेयर और रख‑रखाव में सहयोग, साथ ही 2028‑29 में भारतीय सैन्य प्रशिक्षक को ऑस्ट्रेलिया के रक्षा कॉलेज में तैनात करने की योजना शामिल है। यह कदम चीन की हालिया पनडुब्बी‑प्रक्षेपित दीर्घ‑दूरी बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताओं को संबोधित करने के लिए महत्वपूर्ण है।
ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक सहयोग का विस्तार
ऊर्जा सुरक्षा ढाँचे के तहत कोयला, डीज़ल, लिक्विड ईंधन और प्राकृतिक गैस की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करने पर दोनों पक्षों ने प्रतिबद्धता जताई है। साथ ही, व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (CECA) और द्विपक्षीय निवेश संरक्षण ढाँचे को तेज़ी से लागू करने का संकल्प लिया गया, जिससे दोनों देशों के व्यापार‑निवेश संबंधों में नई गति मिलेगी। यह आर्थिक बंधन इन्डो‑पैसिफिक में वैकल्पिक आपूर्ति शृंखलाओं के निर्माण में भी सहायक होगा।
भविष्य की दिशा और क्षेत्रीय प्रभाव
विदेश सचिव विक्रम मिश्री ने चीन के मिसाइल परीक्षण को लेकर चिंता व्यक्त की और कहा कि शांति, सुरक्षा और स्थिरता के लिए दोनों देशों को साझेदारी की महत्वता को बढ़ाना आवश्यक है। उन्होंने क़्वाड को क्षेत्रीय चुनौतियों—जैसे बुनियादी ढाँचा, उभरती प्रौद्योगिकियां, साइबर सुरक्षा और मानवीय सहायता—के समाधान में एक प्रमुख मंच बताया। इस व्यापक समझौते से भारत‑ऑस्ट्रेलिया के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई शक्ति मिली है, जो भविष्य में अधिक संयुक्त अभ्यास, तकनीकी सहयोग और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के विकास में परिलक्षित होगी।