नई संयुक्त रक्षा एवं सुरक्षा घोषणा के तहत भारत और ऑस्ट्रेलिया ने सैन्य अभ्यास, तकनीकी सहयोग और समुद्री सुरक्षा में सहयोग को तीव्र करने का वचन दिया। दोनों देश अब अधिक जटिल बहुपक्षीय अभ्यास और कुशल रक्षा कर्मियों की आपसी भर्ती पर भी काम करेंगे।
नई रक्षा घोषणा के साथ भारत और ऑस्ट्रेलिया ने 9 जुलाई 2026 को मिलकर एक व्यापक रोडमैप अपनाया, जो इंडो‑पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक अनिश्चितता को देखते हुए दोनो देशों के बीच सैन्य संबंधों को नई ऊँचाइयों पर ले जाने का लक्ष्य रखता है। यह घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथोनी अल्बानेज़ के बीच एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में घोषित की गई।
मुख्य बिंदु और रणनीतिक महत्व
घोषणा में नियमित रक्षा‑संबंधी परामर्श, संयुक्त सैन्य अभ्यासों की जटिलता बढ़ाना, और दोनों सेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी व सूचना साझाकरण को तेज़ करना शामिल है। इसके अलावा, दोनों पक्ष समुद्री सुरक्षा सहयोग को गहरा करने हेतु एक इंडो‑पैसिफिक समुद्री सुरक्षा सहयोग रोडमैप लागू करेंगे, जिससे भारतीय महासागर तथा व्यापक इंडो‑पैसिफिक में सतत निगरानी और प्रतिक्रिया क्षमता सुनिश्चित होगी।
कर्मचारी विनिमय और कौशल विकास
समझौते में शिक्षा, प्रशिक्षण और लियाज़ोन नियुक्तियों के माध्यम से कर्मियों के आदान‑प्रदान को बढ़ाने का भी प्रावधान है। दोनों राष्ट्र अपने‑अपने रक्षा बलों में कुशल कर्मियों की भर्ती के लिए सहयोगी मंच स्थापित करेंगे, जिससे तकनीकी विशेषज्ञता और कार्यबल की लचीलापन दोनों में सुधार होगा।
रक्षा उद्योग एवं तकनीकी सहयोग
रक्षा उद्योग के एकीकरण को तेज़ करने हेतु दोनों देशों ने आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुदृढ़ करने, नवाचार और उन्नत विज्ञान‑प्रौद्योगिकी में सहयोग बढ़ाने का संकल्प लिया। इस पहल से स्थानीय उत्पादन को प्रोत्साहन मिलेगा और दोनों देशों के रक्षा उद्यमों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बेहतर स्थिति मिलेगी।
क्षेत्रीय स्थिरता और अंतर्राष्ट्रीय कानून
दोनों नेता क्षेत्रीय शांति के लिए विवादों का शांतिपूर्ण समाधान, बल प्रयोग से बचाव और अंतर्राष्ट्रीय कानून के सम्मान पर ज़ोर देते हुए, 1982 के संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून (UNCLOS) के सिद्धांतों, मुक्त नौवहन और हवाई मार्ग की सुरक्षा को पुनः पुष्टि करते हैं। वे IORA, ASEAN‑आधारित क्षेत्रीय ढाँचा और प्रशांत द्वीप फ़ोरम जैसे संस्थानों के समर्थन को भी दोहराते हैं।
समग्र रूप से, यह नई घोषणा 2009 के भारत‑ऑस्ट्रेलिया सुरक्षा सहयोग समझौते का विस्तार है और दो‑दो पक्षीय तथा बहुपक्षीय मंचों को सुदृढ़ करने के लिए एक रणनीतिक कदम है, जो भविष्य में संभावित भू‑राजनीतिक तनावों के प्रति एक सामूहिक उत्तर प्रदान करेगा।