भारत के कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अफगानिस्तान के तालिबान सरकार के कृषि मंत्री मवलावी अताउल्लाह उमारी के साथ पुसा कैंपस में द्विपक्षीय बैठक की। दोनों पक्ष ICAR‑अफ़गान राष्ट्रीय कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के मौजूदा समझौते को 2026 के बाद भी जारी रखने पर चर्चा कर रहे हैं।
नई दिल्ली (रिपोर्ट) – भारतीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को अफगानिस्तान के तालिबान‑शासित सरकार के कृषि मंत्री मवलावी अताउल्लाह उमारी के साथ पुसा कैंपस में एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक की। इस मुलाकात का मुख्य उद्देश्य भारत‑अफगानिस्तान कृषि सहयोग को सुदृढ़ करना और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) तथा अफगान राष्ट्रीय कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (NASTU) के बीच 2026 में समाप्त होने वाले मौजूदा समझौते (MoU) को पुनः नवीनीकरण या विस्तार के विकल्पों पर विचार करना था।
पृष्ठभूमि: भारत‑अफगान कृषि संबंधों की यात्रा
भारत ने पिछले दो दशकों में अफगानिस्तान के कृषि क्षेत्र को तकनीकी, प्रशिक्षण और बुनियादी ढाँचा समर्थन प्रदान किया है। 2008 में स्थापित ICAR‑NASTU MoU ने अफगान छात्रों को पुसा में उन्नत कृषि विज्ञान की पढ़ाई, बीज उत्पादन, जल प्रबंधन और फसल रोग नियंत्रण में विशेषज्ञता हासिल करने का अवसर दिया। इस सहयोग ने अफगान किसानों की उत्पादकता में 15‑20% की वृद्धि का अनुमानित योगदान दिया है।
बैठक के मुख्य बिंदु
बैठक में दोनों पक्षों ने कई प्रमुख बिंदुओं पर सहमति जताई: (i) मौजूदा MoU को 2026 के बाद कम से कम पाँच और वर्षों के लिए विस्तारित करना, (ii) जलवायु‑सुरक्षित फसल प्रौद्योगिकी एवं सूखा‑प्रतिरोधी बीजों के विकास के लिए संयुक्त शोध केंद्र स्थापित करना, (iii) अफगान कृषि छात्रों के लिए भारत में इंटर्नशिप और व्यावहारिक प्रशिक्षण के अवसर बढ़ाना, तथा (iv) दोनों देशों के बीच कृषि व्यापार को सुगम बनाने हेतु कस्टम ड्यूटी में रियायतें देना।
राजनीतिक और सुरक्षा चुनौतियाँ
तालिबान के अधीन अफगानिस्तान में सुरक्षा स्थिति में सुधार के बावजूद, अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों और तकनीकी साझेदारों के लिए जोखिम बना हुआ है। भारत ने इस जोखिम को कम करने के लिए अपनी सुरक्षा एजेंसियों को सहयोग के दायरे में शामिल करने का प्रस्ताव रखा, जिससे परियोजनाओं की निरंतरता सुनिश्चित हो सके। विशेषज्ञों का मानना है कि स्थायी कृषि सहयोग दोनों देशों के सामाजिक‑आर्थिक विकास को स्थिर करने में अहम भूमिका निभा सकता है, विशेषकर महिलाओं के सशक्तिकरण और ग्रामीण रोजगार सृजन में।
भविष्य की संभावनाएँ
यदि समझौता सफलतापूर्वक नवीनीकृत होता है, तो यह भारत के ‘Neighbourhood First’ नीति के तहत एक मॉडल सहयोग बन सकता है। साथ ही, अफगानिस्तान के कृषि उत्पादन में सुधार से खाद्य सुरक्षा, निर्यात आय और अंतरराष्ट्रीय मान्यताओं में सुधार की उम्मीद है। इस पहल को देखते हुए, कई अंतरराष्ट्रीय विकास एजेंसियों ने भी इस सहयोग को वित्तीय सहायता प्रदान करने की इच्छा व्यक्त की है।