ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता आयतोल्या अली खामेनेई को मशहद के इमाम रज़ा श्राइन में अंतिम विदाई दी गई। युद्ध और राजनीतिक उथल-पुथल के बीच मोजtabा खामेनेई की सार्वजनिक अनुपस्थिति ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता आयतोल्या अली खामेनेई को शुक्रवार तड़के मशहद स्थित पवित्र इमाम रज़ा श्राइन में दफन कर दिया गया। एक सप्ताह तक चले व्यापक शोक कार्यक्रमों, रैलियों और धार्मिक अनुष्ठानों के बाद यह अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। खामेनेई का निधन 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हवाई हमलों के दौरान हुआ था, जिसने मध्य पूर्व के भू-राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह बदल कर रख दिया है।
मशहद में उमड़ा जनसैलाब और आक्रोश
अंतिम संस्कार के दौरान मशहद की सड़कें भारी भीड़ से पट गईं। सफेद पगड़ी पहने धर्मगुरुओं और काले वस्त्रों में शोक मनाने वाले अनुयायियों के बीच आक्रोश भी स्पष्ट था। प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। 'डेथ टू अमेरिका' के नारों और प्रतिशोध की मांग के बीच, खामेनेई के ताबूत को एक हेलीकॉप्टर के जरिए भीड़ के ऊपर से उड़ाते हुए श्राइन के भीतर ले जाया गया। यह दृश्य ईरान की धार्मिक और क्रांतिकारी भावना के चरम को दर्शाता है।
मोजtabा खामेनेई की रहस्यमयी अनुपस्थिति
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अधिक ध्यान मोजtabा खामेनेई की ओर रहा, जिन्हें मार्च की शुरुआत में नया सर्वोच्च नेता घोषित किया गया था। युद्ध शुरू होने के बाद से ही मोजtabा सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दिए हैं। हालांकि उन्होंने लिखित बयान जारी किए हैं, लेकिन उनकी कोई भी तस्वीर या वीडियो सार्वजनिक नहीं किया गया है।
तेहरान के वरिष्ठ सूत्रों के अनुसार, मोजtabा उस हमले में गंभीर रूप से घायल हुए थे जिसमें उनके पिता की मृत्यु हुई थी। बताया जा रहा है कि वे चेहरे की विकृति और अंगों की गंभीर चोटों से उबर रहे हैं। इसके साथ ही, सुरक्षा कारणों और भविष्य के संभावित हमलों के डर से भी राज्य सुरक्षा एजेंसियां उन्हें सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूर रख रही हैं।
ईरान के भविष्य पर अनिश्चितता के बादल
खामेनेई का शासन लगभग चार दशकों तक रहा, जिसके दौरान उन्होंने ईरान की राजनीतिक और सैन्य शक्ति को अभूतपूर्व ऊंचाई पर पहुँचाया। उनकी मृत्यु के बाद ईरान एक संक्रमण काल से गुजर रहा है। एक ओर जहाँ देश युद्ध के आर्थिक प्रभावों और प्रतिबंधों से जूझ रहा है, वहीं दूसरी ओर सत्ता के हस्तांतरण की प्रक्रिया और मोजtabा की स्थिति को लेकर आंतरिक और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अनिश्चितता बनी हुई है।