अंकारा में हुए नाटो शिखर सम्मेलन में टर्की ने अपनी रणनीतिक स्थिति को सुदृढ़ किया, जबकि अमेरिका‑टर्की संबंधों में नया मोड़ आया। राष्ट्रपति ट्रम्प के आगमन और सशस्त्र सहयोग पर चर्चा ने गठबंधन की आंतरिक विभाजन को उजागर किया।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- टर्की ने नाटो शिखर सम्मेलन में अपनी कूटनीतिक स्थिति को मजबूत किया
- अमेरिका‑टर्की संबंधों में S-400 विवाद के बाद संभावित बदलाव
- नाटो के भीतर बजट, तकनीकी और रणनीतिक असहमति बढ़ी
अंकारा में आयोजित 77‑वर्षीय नाटो शिखर सम्मेलन को लेकर कई महीनों से अनिश्चितता बनी रही, विशेषकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की भागीदारी को लेकर। अंततः ट्रम्प ने अपने विशिष्ट शैली में भारत‑समान रवैये के साथ शिखर सम्मेलन में भाग लिया, जबकि उन्होंने स्पेन के साथ व्यापारिक कटऑफ़ और ग्रीनलैंड पर पुनः दावा किया।
टर्की की जीत के मुख्य कारण
शिखर सम्मेलन का वास्तविक विजेता मेजबान टर्की रहा। एर्दोगान की मेजबानी के तहत टर्की ने नाटो के भीतर अपनी रणनीतिक महत्वता को फिर से स्थापित किया, विशेषकर अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद S-400 प्रणाली की खरीद को लेकर हुई टकराव के बाद। ट्रम्प ने कई बार संकेत दिया कि वह टर्की पर लगाए गए CAATSA प्रतिबंधों को हटाने और F-35 कार्यक्रम में पुनः प्रवेश की संभावना को खुला रखता है। यह संकेत टर्की को अमेरिकी रक्षा बाजार में पुनः प्रवेश की राह प्रदान कर सकता है।
नाटो के भीतर बढ़ती विभाजन
शिखर सम्मेलन ने नाटो के भीतर मौजूदा विभाजन को स्पष्ट रूप से दिखाया। यूरोप के कई सदस्य देश रक्षा खर्च में वृद्धि करने के लिए तैयार हैं, परंतु ट्रम्प की यूक्रेन, ग्रीनलैंड और इरान संबंधी नीतियों ने ट्रांसअटलांटिक भरोसे को क्षीण किया है। साथ ही, यूरोप के देशों ने गाजा, इरान, लीबिया और सूडान में मध्यस्थता के मंचों में लगभग निरंकुश रहकर आलोचना का सामना किया।
यूरोप‑अमेरिका के बजट संघर्ष
2026 में नाटो ने यूक्रेन को €70 बिलियन की सैन्य सहायता का वादा किया, जो पूरी तरह से यूरोपीय संघ द्वारा वित्तपोषित होगी। अमेरिकी हथियारों की खरीद को ट्रम्प की 'बाय‑बैक' योजना के तहत अमेरिकी कंपनियों को ही सीमित किया गया है, जिससे यूक्रेन‑अमेरिका वित्तीय असंतुलन बढ़ा है। यूरोपीय देशों ने भी रक्षा नवाचार में यूरोपीय संघ के सुरक्षा निधि (SAFE) के तहत 65 % स्थानीय प्रोक्योरमेंट की शर्तें रखी हैं, जिससे गैर‑EU सदस्य देशों को 'विदेशी' माना जा रहा है।
भविष्य की दिशा
टर्की के EU प्रवेश के संबंध में यूरोपीय संघ की लचीलापन अभी भी सीमित है, परंतु टर्की ने अमेरिका, यूके और पश्चिम एशिया के साथ अपने संबंधों को गहरा किया है। यदि ट्रम्प की प्रतिबंध-हटाने की इच्छा साकार होती है, तो टर्की S-400 को त्याग कर F-35 कार्यक्रम में पुनः प्रवेश कर सकता है, जिससे अमेरिकी‑टर्की संबंधों में एक नाटकीय मोड़ आएगा। इस परिवर्तन से नाटो के भीतर शक्ति संतुलन और रणनीतिक सहयोग के नए परिदृश्य उभर सकते हैं।