होर्मुज जलमार्ग में हमला झेलने वाले तीन थाई नाविकों ने अपने नियोक्ता प्रेशियस शिपिंग और सम्बंधित कंपनियों के खिलाफ बैंकॉक के सेंट्रल लेबर कोर्ट में मुआवजे की मांग की है। उन्होंने बताया कि हमले से उन्हें गंभीर मनोवैज्ञानिक आघात हुआ और नौकरी से भी बर्खास्त कर दिया गया।

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मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • तीन नाविकों ने 10 लाख थाई बाट (लगभग 30,000 USD) मुआवजे की मांग की।
  • कंपनी ने सुरक्षा जोखिम के बावजूद जहाज को होर्मुज से गुजरने दिया।
  • हमले के बाद उन्हें नौकरी से निकाला गया और गंभीर PTSD का शिकार हुए।

बैंकॉक – 10 जुलाई 2026 – स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में मार्च 2026 में हुए हमले से बच निकले तीन थाई जहाज़ी अब अपने नियोक्ता प्रेशियस शिपिंग और दो संबद्ध कंपनियों के खिलाफ सेंट्रल लेबर कोर्ट में मुकदमा दायर कर चुके हैं। उन्होंने प्रत्येक 10 लाख थाई बाट (लगभग 30,000 अमेरिकी डॉलर) का मुआवजा माँगा है, साथ ही यह भी कहा कि इस हमले ने उन्हें गहरा मनोवैज्ञानिक आघात पहुँचाया है।

पृष्ठभूमि

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज विश्व का सबसे रणनीतिक समुद्री मार्ग है, जहाँ से विश्व के लगभग 20 % कच्चे तेल और एलएनजी का परिवहन होता है। हाल के महीनों में यूएस‑ईरान तनाव के कारण इस जलमार्ग की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ी है। कई देशों के नाविक इस क्षेत्र में काम करते हैं, और अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) ने कई बार इस क्षेत्र में सुरक्षा उपायों को कड़ी करने की अपील की है।

घटना की विस्तृत जानकारी

11 मार्च को, ओमान के उत्तर में स्थित थाई मालवाहक जहाज़ ‘मायूरी नारी’ पर अचानक एक हमले की रिपोर्ट मिली। इस हमले में तीन क्रू सदस्य मौके पर ही मार गए, जबकि शेष 20 सदस्यों को बचाया गया। बच निकले तीन नाविक – पनिथी तुमकाएव, नोप्पाडोन वोंगसुवान और सुरदेस मानपुएन – ने बताया कि हमले की आवाज़ और ध्वनि ने उनके मन में स्थायी PTSD के लक्षण पैदा कर दिए हैं।

कानूनी कार्रवाई

नाविकों के वकील का कहना है कि प्रेशियस शिपिंग ने ज्ञात सुरक्षा जोखिमों के बावजूद जहाज़ को होर्मुज के खतरनाक क्षेत्र से गुजरने का आदेश दिया। हमले के बाद, कंपनी ने तीनों को नौ‑महीने के अनुबंध को आधे में समाप्त कर दिया और केवल दो महीने के वेतन के बराबर मुआवजा दिया। इस कारण वे अब जहाज़ पर काम करने की स्थिति में नहीं हैं और लगातार दवाइयों पर निर्भर हैं। वकील ने बताया कि कंपनी से बातचीत करके समाधान खोजने की कोशिश की गई, परन्तु कंपनी ने पूरी जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया, जिससे अदालत का रुख अपनाना पड़ा।

क्षेत्रीय और वैश्विक प्रभाव

यह मामला न केवल थाई नौकरियों के अधिकारों को उजागर करता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में सुरक्षा मानकों की कमी को भी रेखांकित करता है। यदि बड़े शिपिंग कंपनियों को ऐसी लापरवाही के लिए जवाबदेह नहीं ठहराया गया, तो अन्य समान परिस्थितियों में नाविकों को फिर से जोखिम उठाना पड़ेगा। इस मुकदमे का परिणाम शिपिंग उद्योग में सुरक्षा प्रोटोकॉल, बीमा कवरेज, और श्रम अधिकारों पर व्यापक पुनर्विचार को प्रेरित कर सकता है।

भविष्य की संभावनाएँ

अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विशेषकर IMO और क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा एजेंसियों, को अब इस प्रकार के हमलों को रोकने के लिए अधिक सख्त नियम और निगरानी तंत्र स्थापित करने की आवश्यकता है। साथ ही, शिपिंग कंपनियों को अपने कर्मियों के मानसिक स्वास्थ्य के प्रति अधिक संवेदनशीलता दिखानी चाहिए, क्योंकि PTSD जैसी स्थितियों का दीर्घकालिक आर्थिक और सामाजिक प्रभाव अत्यधिक गंभीर हो सकता है।