संयुक्त राज्य कांग्रेस के डेमोक्रेट रो खन्ना को पश्चिमी किनारे में इज़राइली बस्तियों ने 90 मिनट तक रोका। इस दौरान इज़राइल डिफेंस फोर्स (आईडीएफ) ने बस्तियों का समर्थन किया, जबकि अमेरिकी दूतावास के हस्तक्षेप से समूह को रिहा किया गया। घटना ने कब्जे की जटिलताओं और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया को उजागर किया।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • रो खन्ना को इज़राइली बस्तियों ने 90 मिनट तक हिरासत में रखा
  • आईडीएफ ने बस्तियों का समर्थन किया, अमेरिकी दूतावास के हस्तक्षेप से रिहा किया
  • घटना ने पश्चिमी किनारे के कब्जे की जटिलता और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया उजागर की

संयुक्त राज्य कांग्रेस के डेमोक्रेट रो खन्ना ने 8 जुलाई को वेस्ट बैंक के दक्षिणी गाँव ख़िरबेत ज़नुता के पास एक बस्ती द्वारा लगभग 90 मिनट तक हिरासत का सामना किया। उनकी यात्रा, जो फिलिस्तीनियों के जीवन पर कब्जे के प्रभाव को समझने के लिए एक तथ्य-खोज मिशन थी, अचानक बस्तियों के साथ टकराव में बदल गई।

घटना का विवरण

खन्ना की टीम ने अपने वाहन से यात्रा के दौरान बस्तियों को देखा, जो अमेरिकी निर्मित राइफलें लेकर तैयार थे। खन्ना ने बताया कि बस्तियों के युवा सदस्य, उम्र 21‑22 वर्ष, हँसी‑मजाक के साथ “हमने तुम्हें रोक लिया” कह रहे थे। उनका अनौपचारिक व्यवहार, अमेरिकी करों से वित्त पोषित इज़राइल की सेना के प्रति अपमानजनक रवैया, और अमेरिकी दूतावास की चिंता का उल्लेख करने के बाद भी अनदेखा किया गया।

पश्चिमी किनारा में बस्तियों की भूमिका

1967 के युद्ध के बाद स्थापित 160 से अधिक बस्तियों में लगभग 7‑लाख इज़राइलियों का निवास है, जो अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत गैरकानूनी माने जाते हैं। बस्तियों के विस्तार ने स्थानीय फिलिस्तीनी समुदायों के जीवन को बाधित किया, रोजगार के अवसर घटाए और आर्थिक निर्भरता बढ़ाई। अक्टूबर 2023 में हमास के हमले के बाद बस्तियों की गतिविधियों में वृद्धि देखी गई, जिससे कई गाँव खाली हुए और स्थानीय तनाव बढ़ा।

आईडीएफ की प्रतिक्रिया और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

इज़राइल डिफेंस फोर्स (आईडीएफ) ने बाद में बताया कि उनका दल बस्तियों द्वारा वाहनों को रोकने की सूचना पर आया, लेकिन उन्होंने “सिविलियन को अलग किया” और खन्ना की टीम को आगे बढ़ने दिया। यह बयान बस्तियों की हिटिंग और अमेरिकी प्रतिनिधि को रोकने के बीच अंतर को स्पष्ट नहीं करता, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय में प्रश्न उठे। संयुक्त राष्ट्र के कई सदस्य और मानवाधिकार समूह इस तरह के “अपराधरहित” व्यवहार को निरंतर असहनीय मानते हैं।

राजनीतिक प्रभाव और भविष्य की दिशा

घटना ने अमेरिकी कांग्रेस में पश्चिमी किनारे के मुद्दे पर नई चर्चा को जन्म दिया। खन्ना ने कहा कि इस अनुभव ने उन्हें “शक्ति की अभिज्ञता” का एहसास कराया और फिलिस्तीनी जनता की निराशा को समझने में मदद की। उन्होंने 2028 के चुनाव में पुनः चुनाव की संभावना जताई, यह कहते हुए कि वेस्ट बैंक यात्रा ने उनके प्रतिबद्धता को मजबूत किया। इस घटना का दीर्घकालिक प्रभाव न केवल अमेरिकी-इज़राइली संबंधों पर, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और मानवाधिकार पर भी पड़ेगा।