यूरोपीय संघ ने बच्चों को सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर अनियंत्रित पहुँच से बचाने हेतु सख़्त आयु‑पुष्टिकरण और स्क्रीन‑टाइम सीमाएँ लागू करने की योजना पेश की है। यह कदम डिजिटल सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और डेटा संरक्षण के व्यापक यूरोपीय एजेंडा का हिस्सा है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • EU डिजिटल सेवाएँ अधिनियम के तहत 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया से प्रतिबंधित करेगा।
  • प्लेटफ़ॉर्म को सख़्त आयु‑पुष्टिकरण, स्क्रीन‑टाइम सीमा और सामग्री फ़िल्टरिंग लागू करनी होगी।
  • नियमों का उल्लंघन करने पर भारी जुर्माना और संभावित सेवा प्रतिबंध लगेंगे।

यूरोपीय आयोग ने 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया पर अनियंत्रित पहुँच से बचाने के लिए एक विस्तृत नियामक ढांचा प्रस्तुत किया है। यह प्रस्ताव डिजिटल सेवाएँ अधिनियम (DSA) के तहत तैयार किया गया है, जो पहले से ही बड़े प्लेटफ़ॉर्मों पर पारदर्शिता और जिम्मेदारी को सुदृढ़ करता है। अब आयोग का लक्ष्य बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को प्राथमिकता देना और उन्हें साइबर‑बुलीइंग, नशे की लत और डेटा दुरुपयोग से बचाना है।

पृष्ठभूमि और कारण

पिछले कुछ वर्षों में यूरोपीय संघ ने कई अध्ययन और सार्वजनिक सर्वेक्षणों के माध्यम से यह पाया कि किशोरों में अत्यधिक स्क्रीन‑टाइम मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं, नींद में बाधा और शैक्षणिक प्रदर्शन में गिरावट का कारण बन रहा है। साथ ही, सोशल मीडिया कंपनियों द्वारा उपयोगकर्ता डेटा का बड़े पैमाने पर संग्रहण और विज्ञापन‑आधारित मॉनिटाइज़ेशन मॉडल को लेकर भी गंभीर चिंताएँ उठी हैं। इन कारकों को देखते हुए, EU ने बच्चों के लिए विशेष सुरक्षा उपायों को अनिवार्य करने का निर्णय लिया।

नियमों का मुख्य बिंदु

नए नियमों में प्रमुख प्रावधान शामिल हैं: (i) सभी प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म को उपयोगकर्ता की आयु का प्रमाणित करने हेतु विश्वसनीय पहचान‑जांच प्रणाली लागू करनी होगी; (ii) 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को प्लेटफ़ॉर्म पर पहुँच प्रतिबंधित होगी, जबकि 13‑17 वर्ष के लिए दैनिक स्क्रीन‑टाइम को 2 घंटे तक सीमित किया जाएगा; (iii) बाल‑अनुकूल सामग्री को प्राथमिकता देने और हानिकारक सामग्री को स्वचालित रूप से फ़िल्टर करने के लिए AI‑आधारित मॉडरेशन टूल्स का उपयोग अनिवार्य किया जाएगा। उल्लंघन करने वाले प्लेटफ़ॉर्म पर 10% तक वार्षिक वैश्विक टर्नओवर के बराबर जुर्माना या सेवाओं का प्रतिबंध लगाया जा सकता है।

उद्योग और राजनैतिक प्रतिक्रिया

ट्विटर, फेसबुक‑मेटा और टिकटॉक जैसी बड़ी कंपनियों ने प्रारम्भिक रूप से इस पहल के प्रति मिश्रित प्रतिक्रिया दी है। कुछ ने कहा कि आयु‑पुष्टिकरण तकनीकें मौजूदा गोपनीयता‑कानूनों के साथ टकराव कर सकती हैं, जबकि अन्य ने कहा कि यह “बच्चों की सुरक्षा में एक महत्वपूर्ण कदम” है। यूरोपीय संसद के कई सदस्य इस प्रस्ताव का समर्थन कर रहे हैं, लेकिन कुछ दक्षिणी यूरोपीय देशों के प्रतिनिधियों ने कहा कि कठोर नियम छोटे उद्यमों और नवाचार को बाधित कर सकते हैं।

भारत और वैश्विक प्रभाव

भारत में भी बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर समान चर्चा चल रही है, जहाँ हाल ही में सरकार ने डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर बाल‑सुरक्षा दिशानिर्देश जारी किए हैं। EU के इस कदम से भारतीय नियामकों के लिए एक अंतरराष्ट्रीय मानक स्थापित हो सकता है, जिससे भविष्य में भारत‑EU डिजिटल सहयोग में नई दिशा मिल सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि EU इस नियमावली को सफलतापूर्वक लागू करता है, तो अन्य देशों में भी समान कानूनों का उदय संभव है, जिससे वैश्विक स्तर पर डिजिटल बच्चों की सुरक्षा में एक नया युग शुरू हो सकता है।