सोशल मीडिया पर वायरल हुए चार वीडियो वास्तव में यूएस‑ईरान के हालिया संघर्ष से असंबंधित हैं। इन क्लिप्स की जाँच से पता चला कि वे माल्टा, मॉस्को, हांगकांग और दुबई की वास्तविक घटनाओं को दर्शाते हैं।

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मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • वायरल वीडियो यूएस‑ईरान के किसी भी सैन्य हमले से संबंधित नहीं हैं।
  • वीडियो क्रमशः माल्टा, मॉस्को, हांगकांग और दुबई में हुई घटनाओं की रिकॉर्डिंग हैं।
  • भ्रामक सामग्री के प्रसार को रोकने हेतु तथ्य‑जाँच आवश्यक है।

जुलाई 8 से शुरू हुए यूएस‑ईरान तनाव के बीच, सोशल मीडिया पर कई क्लिप्स ने दावा किया कि वे दोनों देशों के बीच हुए सैन्य हमलों को दर्शाते हैं। भारत टुडे के तथ्य‑जाँच विभाग ने चार ऐसे वीडियो का विश्लेषण करके स्पष्ट किया कि ये क्लिप्स पूरी तरह से अलग‑अलग घटनाओं की हैं, न कि किसी हालिया युद्ध‑क्रिया की।

माल्टा में विस्फोट

पहला वीडियो एक बड़े विस्फोट को दिखाता है, जिसे कई लोग कुवैती अमेरिकी एयरबेस पर ईरानी हमले के रूप में पेश कर रहे थे। फ्रेम‑रिवर्स सर्च से पता चला कि यह 2 जून को माल्टा के एक आतिशबाज़ी कारखाने में हुआ था। इस घटना में दो लोग हल्की चोटों से बच गए, जबकि कोई कर्मी मौजूद नहीं था।

मॉस्को में ड्रोन‑आग

दूसरा क्लिप मॉस्को के सदोवोद मार्केट में हुई आग को दिखाता है, जिसे इज़राइल के तेल अवीव में ईरानी मिसाइल के बाद माना गया था। बेलारूस‑आधारित बेलसैट ने 18 जून को वही दृश्य प्रकाशित किया था, जिसमें बताया गया कि ड्रोन ने इस शॉपिंग सेंटर को लक्ष्य बनाया था।

हांगकांग की ऊँची इमारतें

तीसरा वीडियो, जिसे कई लोग ईरानी आईआरजीसी मुख्यालय की अमेरिकी बमबारी मानते थे, वास्तव में हांगकांग के ताइ पो जिले में एक आवासीय इमारत में लगी आग का रिकॉर्ड है। यह क्लिप NBC4 वाशिंगटन और CBS न्यूज़ दोनों ने 2025 के अंत में प्रकाशित किया था, जिसमें 44 मौतों की सूचना दी गई थी।

दुबई में गोदाम की आग

चौथा क्लिप दुबई के उम रामूल क्षेत्र में एक गोदाम में उठती धुएँ की तस्वीर दिखाता है, जिसे यूएस ने ईरान के क़रमांशा प्रांत में इमाम हसन बैराक्स पर हमले का प्रमाण बताया गया। असल में यह 25 नवंबर 2025 को दुबई के स्थानीय इंस्टाग्राम अकाउंट द्वारा प्रकाशित हुआ था, जिसमें बताया गया कि गोदाम में आग लग गई थी और कोई चोट नहीं आई।

भ्रामक सामग्री के प्रभाव

ऐसे झूठे वीडियो न केवल अंतरराष्ट्रीय तनाव को बढ़ाते हैं, बल्कि सार्वजनिक धारणा को भी विकृत करते हैं। तथ्य‑जाँच संस्थानों की भूमिका इस डिजिटल युग में और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है, जहाँ हर सेकंड नई जानकारी वायरल होती है। इस प्रकार की जाँचें न केवल गलत सूचना को रोकती हैं, बल्कि जिम्मेदार मीडिया उपभोग की संस्कृति को भी प्रोत्साहित करती हैं।