ब्रिटेन ने ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को आधिकारिक तौर पर आतंकवादी संगठन घोषित किया, जिससे इस समूह को समर्थन देना अब आपराधिक अपराध माना जाएगा। निर्णय के पीछे सुरक्षा चिंताएँ, साइबर हमले और पत्रकार हत्याओं की साजिशें हैं।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- ब्रिटेन ने IRGC को आतंकवादी समूह घोषित कर प्रतिबंध लागू किया।
- निर्णय में ईरान‑संबंधित साइबर हमले और पत्रकार हत्याओं की साजिशें प्रमुख थीं।
- इस कदम से यूके‑ईरान रिश्तों में तनाव बढ़ने और अन्य देशों को समान उपाय अपनाने की संभावना है।
लंदन में गृह मंत्रालय (होम ऑफिस) ने 13 जुलाई 2026 को आधिकारिक तौर पर घोषणा की कि ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को आतंकवादी संगठन के रूप में मान्यता दी गई है। इस निर्णय के साथ, यूके की अदालतों में IRGC को समर्थन या वित्तीय सहायता प्रदान करना अब आपराधिक दायित्व बन जाएगा। यह कदम ब्रिटेन की राष्ट्रीय सुरक्षा को बढ़ाने के उद्देश्य से लिया गया है, जहाँ पिछले कई वर्षों से इस समूह पर प्रतिबंध लगाने की बहस चल रही थी।
पृष्ठभूमि और ऐतिहासिक संदर्भ
IRGC, 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद स्थापित, ईरान के भीतर सबसे प्रभावशाली सैन्य और राजनीतिक शक्ति में से एक है। इसने देश के कई प्रमुख आर्थिक क्षेत्रों, विदेशी नीतियों और मध्य पूर्व में सैन्य अभियानों को नियंत्रित किया है। संयुक्त राज्य अमेरिका ने 2019 में IRGC को आतंकवादी संगठन घोषित किया था, लेकिन यूरोपीय संघ ने तब तक केवल कुछ उप-इकाइयों को प्रतिबंधित किया था। अब ब्रिटेन का यह कदम यूरोप में पहली बार व्यापक स्तर पर IRGC को पूरी तरह से तालिका में लाने का संकेत है।
निर्णय के पीछे सुरक्षा कारण
ब्रिटिश गृह मंत्रालय ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्य दिखाते हैं कि IRGC ने यूके के हितों को लक्षित करने वाले कई खतरनाक कार्यों में भाग लिया है। इनमें दो ईरानी पत्रकारों की संभावित हत्या की साजिश, ब्रिटिश ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने वाले साइबर हमलों, और ईरान‑समर्थित समूहों द्वारा आयोजित आतंकवादी गतिविधियाँ शामिल हैं। इन घटनाओं ने ब्रिटिश सुरक्षा एजेंसियों की चिंता को तीव्र कर दिया, जिससे इस कठोर कदम की आवश्यकता स्पष्ट हुई।
अन्य प्रतिबंधित समूहों की सूची में विस्तार
IRGC के साथ-साथ, ब्रिटेन ने इस्लामिक मूवमेंट ऑफ द कम्पैनियंस ऑफ द राइट (IMCR) और रूसी फेडरेशन वॉलंटियर कॉर्प्स को भी प्रतिबंधित संगठनों की सूची में जोड़ने की योजना घोषित की है। IMCR को यूके में यहूदी समुदाय के खिलाफ हमलों से जोड़ा गया है, जबकि रूसी समूह को रूसी सैन्य खुफिया एजेंसी के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के हिस्से के रूप में पहचाना गया है। यह व्यापक सूची दर्शाती है कि लंदन अपने राष्ट्रीय सुरक्षा ढाँचे को कई आयामों में सुदृढ़ कर रहा है।
भविष्य के प्रभाव और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
IRGC को आतंकवादी समूह घोषित करने से यूके‑ईरान कूटनीतिक संबंधों में तनाव बढ़ने की संभावना है। ईरान ने पहले भी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को अस्वीकार किया है और संभावित प्रतिकारात्मक उपायों की चेतावनी दी है। साथ ही, यह कदम अन्य यूरोपीय देशों को समान प्रतिबंध लागू करने के लिए प्रेरित कर सकता है, जिससे ईरान के आर्थिक और सैन्य दबाव में वृद्धि हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम यूरोप में सुरक्षा नीति के पुनर्संरचना का एक हिस्सा है, जहाँ आतंकवाद और साइबर खतरे को प्राथमिकता दी जा रही है।
समग्र रूप में, ब्रिटेन का यह निर्णय राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक मजबूत संदेश है, लेकिन यह मध्य‑पूर्वीय भू‑राजनीति में नई जटिलताओं को भी जन्म दे सकता है।