हॉर्मुज जलमार्ग में कंटेनर जहाज़ पर हुए हमले के बाद लापता रहे पुने के तीसरे इंजीनियर हरेम्ब कार्माकर की अब मौत की पुष्टि हो गई है। उनका शव अब ओमान नौसेना के पास है और परिवार अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहा है। इस घटना ने भारत-ईरान संबंधों और समुद्री सुरक्षा पर नई बहस छेड़ दी है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • हरेम्ब कार्माकर की मृत्यु की आधिकारिक पुष्टि
  • हॉर्मुज जलमार्ग में जहाज़ पर प्रोजेक्टाइल हमला
  • परिवार को शव की त्वरित वापसी की मांग

हॉर्मुज जलमार्ग, जो मध्य पूर्व में तेल एवं माल के प्रमुख मार्गों में से एक है, 12 जुलाई को एक सायबर-समुद्री हमले का केंद्र बना। सायप्रस झंडे वाले कंटेनर जहाज़ MV GFS Galaxy पर प्रोजेक्टाइल ने प्रहार किया, जिससे इंजन रूम में आग लग गई और जहाज़ को प्रोपल्शन खोना पड़ा। 24 सदस्यीय क्रू में 11 भारतीय थे, जिनमें हरेम्ब कार्माकर भी शामिल थे, जो तीसरे इंजीनियर के पद पर कार्यरत थे।

घटना की विस्तृत रूपरेखा

रात के 3.30 बजे IST पर जहाज़ ओमानी जल क्षेत्र के निकट था जब अचानक प्रोजेक्टाइल ने उसे मार डाला। जहाज़ को तुरंत एंकर किया गया और क्रू को लाइफबोट में स्थानांतरित किया गया। अधिकांश क्रू को दो घंटे के भीतर ओमान की रॉयल नेवी ने बचा लिया, पर कार्माकर ही एकमात्र लापता रहे। उनका अंतिम संपर्क 2.49 बजे IST पर हुआ, जब उन्होंने बताया कि वे स्ट्रेट को सुरक्षित रूप से पार कर चुके हैं।

परिवार की प्रतिक्रिया और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

परिवार के प्रतिनिधि रिशि टंडन और विवेक टंडन ने भारतीय एक्सप्रेस को बताया कि ओमन नौसेना ने अब तक शव को सुरक्षित रखा है और पोस्ट मोर्टेम के बाद इसे कंपनी को सौंपा जाएगा, फिर पुणे लाया जाएगा। उन्होंने विदेश मंत्रालय से शीघ्र वापसी की मांग की। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने भी इस हमले को “इज़राइल रिवोल्यूशनरी गार्ड” की कार्रवाई बताया और उसी दिन तीसरे दौर के स्ट्राइक की घोषणा की।

भविष्य की संभावनाएँ और नीति-परिणाम

यह घटना भारत के समुद्री कर्मचारियों के लिए सुरक्षा चिंताओं को फिर से उजागर करती है। फॉरवर्ड सीमेंस यूनियन ऑफ इंडिया ने कहा कि भारतीय जहाज़ों को लगातार लक्ष्य बनाया जा रहा है, जबकि कूटनीतिक आश्वासन लगातार टूट रहे हैं। इस हमले के बाद भारत और इरान के बीच कूटनीतिक तनाव बढ़ सकता है, और अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा फ्रेमवर्क को पुनः देखना पड़ेगा। साथ ही, ओमन और यूएस की सामरिक सहयोग भी इस क्षेत्र में नई चुनौतियों का सामना कर रहा है।

परिवार के अंतिम संस्कार की तैयारी

परिवार ने बताया कि शव की सुरक्षित वापसी के बाद ही अंतिम संस्कार किया जाएगा। इस दुखद घटना ने कई भारतीय परिवारों को गहरी पीड़ा में डाल दिया है, जो अपने प्रियजनों की सुरक्षा के लिए अब अधिक स्पष्ट अंतरराष्ट्रीय मानकों की मांग कर रहे हैं।