भारत ने पश्चिमी एशिया में बढ़ते तनाव और हर्मुज जलडमरूमध्य में शिपिंग पर हुए हमलों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। विदेश मंत्रालय ने सभी पक्षों से संयम बरतने और ऊर्जा प्रवाह को सुरक्षित रखने का अनुरोध किया।
नई दिल्ली (ज़ी न्यूज़) – भारत ने बुधवार को कहा कि वह पश्चिम एशिया में हालिया हमलों और तनाव में तेज़ी से "गहरी चिंता" रखता है। यह बयान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जयसवाल ने जारी किया, जिसमें क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और स्थिरता को खतरे में डालने वाले घटनाक्रमों की निंदा की गई।
पृष्ठभूमि और रणनीतिक महत्व
हर्मुज जलडमरूमध्य विश्व के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है, जहाँ से दैनिक लाखों बैरिल कच्चा तेल गुजरता है। इस जलडमरूमध्य पर कई बार हमले हुए हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय शिपिंग और तेल कीमतों में अस्थिरता आई है। पिछले कई हफ्तों में इस मार्ग से गुजरती वाणिज्यिक जहाज़ों पर लक्षित हमले बढ़े हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अनिश्चितता बढ़ी।
अमेरिका‑ईरान तनाव का असर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान पर नई सैन्य कार्रवाई का आह्वान किया और कहा कि वाशिंगटन‑तेहरान के बीच का युद्धविराम "प्रभावी रूप से समाप्त" हो गया है। इस बयान के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत 6.5% तक बढ़ी, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) भी 6% से अधिक बढ़ा। ट्रम्प ने ईरान को चेतावनी दी कि यदि वह हमले जारी रखता है तो अमेरिकी नौसेना फिर से नाकाबंदी लगा सकती है।
भारत की कूटनीतिक रुख
भारत ने सभी पक्षों से "संयम" बरतने, "तनाव घटाने" और "नागरिकों की सुरक्षा" के साथ-साथ "ऊर्जा और वाणिज्य के निरंतर प्रवाह" को सुनिश्चित करने का आग्रह किया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि संवाद और कूटनीति ही दीर्घकालिक शांति का एकमात्र साधन है। भारत ने इतिहास में मध्यस्थता की भूमिका निभाई है और इस बार भी वह क्षेत्रीय स्थिरता को प्राथमिकता देता है।
वैश्विक प्रभाव और भविष्य की दिशा
ऊर्जा कीमतों में अस्थिरता का सीधा असर भारत सहित कई आयात-निर्भर राष्ट्रों की आर्थिक स्थितियों पर पड़ता है। अगर तनाव जारी रहा तो तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं, जिससे महंगाई और व्यापार घाटा दोनों पर असर पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को तुरंत कूटनीतिक प्रयास तेज़ करने चाहिए, ताकि हर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और वैश्विक ऊर्जा बाजार स्थिर रह सके।
संक्षेप में, भारत की गहरी चिंता अंतरराष्ट्रीय शिपिंग सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय शांति के व्यापक प्रभाव को दर्शाती है, जबकि उसका संदेश कूटनीति और संयम पर केंद्रित है।