मैथ्यू एरन वैनडाइक, जो अप्रैल से हिरासत में हैं, ने टिहर जेल के अत्यधिक तैलीय व मसालेदार भोजन के कारण 14 किलोग्राम वजन घटाने का आरोप लगाया। उन्होंने अपने स्वास्थ्य को बचाने हेतु पास्ता, मछली और अन्य प्रोटीन वाले भोजन की अनुमति माँगी है।

मैथ्यू एरन वैनडाइक, एक अमेरिकी नागरिक और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के आतंकवादी मामले में संदिग्ध, अप्रैल से टिहर जेल में बंद हैं। वैनडाइक ने 6 मई से जेल के भोजन को लेकर ‘हंगर स्ट्राइक’ की स्थिति बना ली है, क्योंकि वह इसे अत्यधिक तेलीय, मसालेदार और तले हुए मानते हैं। उनकी दावे के अनुसार, इस असंतुलित आहार ने उन्हें लगभग 14 किलोग्राम (लगभग 30 पाउंड) वजन घटाने पर मजबूर किया, जिससे उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली, शक्ति और दृष्टि पर गंभीर प्रभाव पड़े हैं।

कानूनी पृष्ठभूमि और वर्तमान याचिका

वैनडाइक ने पाटियाला हाउस कोर्ट में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रशांत शर्मा के समक्ष एक याचिका दायर की, जिसमें उन्होंने अपने स्वास्थ्य की रक्षा के लिए स्वयं के भोजन की तैयारी की अनुमति माँगी। याचिका में पास्ता, चावल, दालें, सब्जियां, दूध के विकल्प, साथ ही चिकन, मछली और लाल मांस जैसे प्रोटीन स्रोतों की सूची दी गई है। उन्होंने इन सामग्रियों को स्वयं की लागत पर लाने और एक इंडक्शन स्टोव एवं बुनियादी रसोई उपकरणों का उपयोग करने का प्रस्ताव रखा। कोर्ट ने टिहर जेल के प्रबंधन को इस याचिका पर प्रतिक्रिया देने का निर्देश दिया और सुनवाई 21 जुलाई को दोहराने का आदेश दिया।

विदेशी नागरिकों का केस और NIA की जांच

वैनडाइक के साथ पाँच यूक्रेनी नागरिक भी NIA के तहत टिहर जेल में हिरासत में हैं। उनका आरोप है कि उन्होंने म्यांमार सीमा पर आतंकवादी समूहों को हथियार, ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक जामिंग उपकरणों की ट्रेनिंग दी। इस मामले में सभी सात आरोपी—छह यूक्रेनी और एक अमेरिकी—पर्यटक वीज़ा पर भारत आए और दिल्ली, लखनऊ, कोलकाता जैसे शहरों से गिरफ्तार हुए। कोर्ट ने 3 जुलाई को उनके ज्यूडिशियल कस्टडी को 29 दिनों के लिए बढ़ाया, जिससे अगली सुनवाई 1 अगस्त को निर्धारित हुई।

टिहर जेल की भोजन नीति और अंतरराष्ट्रीय मानदंड

भारत में जेलों की भोजन नीति पर अक्सर आलोचना होती रही है, विशेषकर विदेशी कैदियों के संदर्भ में। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के अनुसार, कैदियों को पोषक तत्वों से भरपूर, स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर भोजन प्रदान किया जाना चाहिए। तेलीय व अत्यधिक मसालेदार भोजन न केवल पोषण में कमी लाता है, बल्कि उच्च रक्तचाप, पाचन समस्याओं और दीर्घकालिक स्वास्थ्य जोखिम भी उत्पन्न कर सकता है। इस कारण वैनडाइक का स्वास्थ्य‑सुरक्षा संबंधी अनुरोध न्यायालय में गंभीरता से लिया गया है।

भविष्य की संभावनाएँ

यदि कोर्ट वैनडाइक को स्वयं के भोजन की अनुमति देता है, तो यह भारतीय जेल प्रणाली में एक नई दिशा स्थापित कर सकता है, जहाँ विशेष स्वास्थ्य आवश्यकताओं वाले कैदियों को वैकल्पिक आहार प्रदान किया जा सकेगा। दूसरी ओर, यह मामला NIA की व्यापक जांच के साथ जुड़ा है, जो भारत‑म्यांमार सीमा पर आतंकवादी नेटवर्क को रोकने के लिए महत्वपूर्ण है। इस प्रकार, वैनडाइक की याचिका न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य की रक्षा का मुद्दा है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा, मानवाधिकार और जेल सुधारों के बीच एक जटिल समीकरण को उजागर करती है।