शोपियन में हुए एक संयुक्त ऑपरेशन में सुरक्षा बलों ने लेष्कर‑ए‑ताइबा के आतंकवादी ज़ाकिर गनी को मार गिराया। यह क्षेत्र में लगभग दस महीने बाद हुई बड़ी टकराव वाली कार्रवाई थी, जिसमें हथियार और गोला‑बारूद बरामद हुए। साथ ही अन्नतनगर में उन्नत निगरानी तकनीक से तीन ओवरग्राउंड वर्कर गिरफ्तार किए गए।
जम्मू‑कश्मीर के शोपियन जिले के चनापोरा में बुधवार को एक गंभीर गोलीबारी के बाद लेष्कर‑ए‑ताइबा (LeT) के ‘श्रेणी‑ए’ आतंकवादी ज़ाकिर गनी का निष्प्राण कर दिया गया। यह घटना दक्षिण कश्मीर में पिछले 10 महीनों में हुई पहली बड़ी सुरक्षा टकराव थी, जो क्षेत्र में सुरक्षा माहौल को बदलने की संभावना रखती है।
संचालन की रूप‑रेखा
जिलाधिकारी, भारतीय सेना और सीआरपीएफ के साथ मिलकर एक संयुक्त ऑपरेशन शनिवार शाम को शुरू किया गया। स्थानीय खुफिया एजेंसियों ने गनी और उसके सहयोगियों के छिपे होने की सूचना दी, जिसके बाद विशेष ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने तेज़ी से कार्रवाई की। ऑपरेशन के दौरान मिलिट्री ने कई प्रकार के हथियार, गोला‑बारूद और युद्ध‑सामग्री बरामद की, जो गनी की आपराधिक नेटवर्क से जुड़ी संभावित हिट‑लिस्ट को दर्शाती है।
ज़ाकिर गनी का पृष्ठभूमि
गनी, कूलगाम जिले का निवासी, दिसंबर 2023 में पाकिस्तान‑आधारित लेष्कर‑ए‑ताइबा में शामिल हुआ था। जंक्शन रिपोर्टों के अनुसार, वह जम्मू‑कश्मीर में कई आतंकवादी हमलों में शामिल रहा, जिसमें हत्याएँ और ध्वस्त करने वाली गतिविधियाँ शामिल हैं। पुलिस ने कहा, “आप भाग सकते हैं, पर छिप नहीं सकते” – यह वाक्यांश गनी के पकड़े जाने की निरंतरता को दर्शाता है।
अन्नतनगर में ओवरग्राउंड वर्कर की गिरफ्तारी
इसी दिन, अन्नतनगर जिले में तीन ओवरग्राउंड वर्कर (OGW) को पुलिस ने गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई पुलिस की फेसियल रिकग्निशन सिस्टम और अन्य उन्नत निगरानी तकनीकों के उपयोग से संभव हुई। अधिकारी ने बताया कि ये संदिग्ध शरबत (Sarbal) से गुजरते समय पुलिस के रडार पर आए और तुरंत हिरासत में ले लिए गए। इस कदम को “श्री अमरनाथ यात्रा के दौरान लागू निगरानी तकनीक की प्रभावशीलता” के रूप में सराहा गया।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर प्रभाव
पिछले साल 9 सितम्बर को कूलगाम के गादर वन में दो भारतीय सैनिकों और दो लेट ऑपरेटिव्स की मौत हुई थी। गनी की मार ने इस प्रकार के बड़े‑पैमाने के आतंकवादी नेटवर्क को क्षति पहुँचाने में भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की प्रतिबद्धता को दोबारा स्थापित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की सफल टकराव न केवल दुश्मन के मनोबल को घटाते हैं, बल्कि स्थानीय जनसंख्या में सुरक्षा का भरोसा भी बढ़ाते हैं।
आगे चलकर, जम्मू‑कश्मीर में सुरक्षा बलों की निरंतर निगरानी, खुफिया साझेदारी और तकनीकी उन्नयन से इस क्षेत्र में आतंकवाद को जड़ से उखाड़ फेंके जाने की उम्मीद है।