विजाग के तट पर नौका डुबने से छह मछुआरों के परिवारों को सरकार ने प्रत्येक ₹10 लाख की आर्थिक मदद दी। लेकिन स्थानीय मछुआरों और पीड़ित परिवारों ने तेज़ खोज और अधिक मुआवजे की मांग कर विरोध किया।
घटना की रूपरेखा
4 जुलाई को बंगाल की खाड़ी में एक मैकेनाइज़्ड मछली पकड़ने वाली नौका डुब गई, जिसमें सात मछुआरे सवार थे। तेज़ हवाओं और कम दबाव वाले मौसमी सिस्टम के कारण नौका उलट गई। एकमात्र जीवित बचा, करी चिन्ना, एक व्यापारी जहाज़ द्वारा समुद्र में漂ते हुए बचाया गया और बताया कि नौका को तेज़ हवाओं ने झटका दिया, जिससे छह साथी गायब हो गए।
सरकारी सहायता और विरोध
विजाग फिशिंग हार्बर में मछली मत्स्य मंत्री कोल्लु रविंद्र ने परिवारों के साथ मिलकर प्रत्येक परिवार को ₹5 लाख मत्स्य विभाग से और अतिरिक्त ₹5 लाख मुख्यमंत्री राहत कोष से कुल ₹10 लाख की चेक वितरित की। वितरण के दौरान कई परिवारों ने इसे मुद्दा बंद करने की कोशिश मानते हुए विरोध किया, और अधिक मुआवजा तथा खोज को तेज़ करने की माँग की।
खोज ऑपरेशन का परिणाम
भारतीय नौसेना और कोस्ट गार्ड के संयुक्त 72‑घंटे के खोज मिशन को 96 घंटे बाद भी किसी भी शेष साक्ष्य या मलबे तक नहीं पहुंचा। तीन सदस्यीय पैनल ने सरकार को रिपोर्ट में कहा कि अब उन छह मछुआरों को मृत मान लेना चाहिए, क्योंकि उनकी कोई निशानी नहीं मिली।
समुदाय की मांगें और भविष्य की दिशा
पूर्वी तट के मैकेनाइज़्ड फिशिंग बॉट ओनर्स एसोसिएशन ने प्रशासन, मरीन पुलिस और मत्स्य विभाग पर देर से प्रतिक्रिया का आरोप लगाया। उन्होंने तत्काल उच्च स्तर की स्वतंत्र जांच और सभी मछली पकड़ने वाली नौकाओं पर GPS ट्रैकिंग प्रणाली लागू करने की मांग की। कई समूह 50 लाख से 1 करोड़ तक की राशि की मांग कर रहे हैं, साथ ही एक अधिक सुदृढ़ समुद्री आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली की भी।
राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव
यह घटना राज्य के कोएलिशन सरकार को प्रशासनिक अक्षमता के आरोपों का सामना करा रही है। यदि मांगों को पूरा नहीं किया गया तो स्थानीय मत्स्य समुदाय में असंतोष बढ़ सकता है, जिससे भविष्य में मत्स्य नीति और समुद्री सुरक्षा नियमों में सुधार की आवश्यकता स्पष्ट हो रही है।