कोझिकोडे रेलवे स्टेशन के 150 साल पुराने विरासत घड़ी टॉवर का भागीय गिरना भारी वर्षा के बाद प्लेटफ़ॉर्म‑2 पर मलबा गिरा गया। समय पर सुरक्षा उपायों ने कोई जखमी नहीं हुआ, पर ट्रेन संचालन में गंभीर व्यवधान उत्पन्न हुए।
कोझिकोडे, केरल – भारतीय रेलवे के इतिहास में 150 साल पुरानी यह घड़ी टॉवर, जो स्टेशन के पुराने भवन का प्रमुख प्रतीक है, 9 जुलाई 2026 को तेज़ बारिश के कारण प्लेटफ़ॉर्म‑2 पर गिर गई। टॉवर में स्थित स्टेशन मास्टर और रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (RPF) के कार्यालय को क्षति पहुँची, पर सुरक्षा कर्मियों की त्वरित कार्रवाई से कोई चोट नहीं आई।
घड़ी टॉवर का इतिहास और महत्व
1876 में ब्रिटिश राज के दौरान निर्मित इस घड़ी टॉवर को कोझिकोडे स्टेशन का एक वास्तुशिल्पीय आकर्षण माना जाता था। यह न केवल समय बताता था, बल्कि दक्षिण‑पूर्वी भारत में रेलवे के शुरुआती दौर की औद्योगिक धरोहर को भी दर्शाता था। कई सालों से यह संरचना कई पुनर्निर्माण कार्यों में शामिल रही, पर इसकी मूल संरचना को संरक्षित रखने की कोशिश की गई।
घटनाक्रम का विवरण
स्थानीय मौसम विभाग ने 8 जुलाई को भारी वर्षा की चेतावनी जारी की थी। उसी दिन टॉवर में सूक्ष्म दरारें देखी गईं, जिससे रेलवे ने तत्काल निरीक्षण और सुरक्षा रिबन लगाए। 9 जुलाई सुबह 11:10 बजे, जब सुरक्षा कर्मियों ने अतिरिक्त बाड़ें लगाई थीं, तब टॉवर के कुछ हिस्से ढह गए, जिससे धातु की पैनल और छत की शीटें प्लेटफ़ॉर्म‑2 तथा ऊपर की ट्रैक‑लाइन पर गिर गईं।
रेल संचालन पर असर
टॉवर के गिरने के बाद, फायर‑एंड‑रेस्क्यू, RPF और पुलिस ने तुरंत क्षेत्र को खाली कर दिया। ओवरहेड ट्रैक लाइन की बिजली सप्लाई को 1, 2 और 3 ट्रैकों से हटा दिया गया, जिससे केवल ट्रैक‑4 पर ही ट्रेनों को चलाया गया। इस कारण थिरुवनंतपुरम‑कोझिकोडे जन शताब्दी एक्सप्रेस, केएसआर बेंगलुरु‑कोझिकोडे एक्सप्रेस और कई लंबी दूरी की ट्रेनें देर से चल पाईं या अर्द्ध‑टर्मिनेट हुईं।
राजनीतिक और प्रशासनिक प्रतिक्रियाएँ
बेपोर के MLA और पूर्व PWD मंत्री पी.ए. मोहम्मद रियास ने घटना स्थल का निरीक्षण कर इसे “गंभीर लापरवाही” कहा। उन्होंने सभी रेलवे स्टेशनों में व्यापक सुरक्षा ऑडिट की माँग की, विशेषकर उन स्टेशनों की जो आधुनिकीकरण के दौर में हैं। रेलवे अधिकारियों ने कहा कि टॉवर का ध्वस्त होना नियोजित विध्वंस से कुछ मिनट पहले हुआ, पर सभी सुरक्षा मानकों का पालन किया गया। उन्होंने आश्वासन दिया कि कुछ ही घंटों में सामान्य संचालन पुनः शुरू हो जाएगा।
भविष्य की दिशा: धरोहर संरक्षण बनाम आधुनिकीकरण
कोझिकोडे की इस घटना ने भारत में कई 19वीं सदी की विरासत संरचनाओं की नाज़ुक स्थिति को उजागर किया है। जलवायु परिवर्तन से बढ़ते तीव्र वर्षा के साथ, पुरानी इमारतों के लिए समय पर रख‑रखाव और जोखिम‑आधारित विध्वंस योजना आवश्यक हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि धरोहर संरक्षण को आधुनिक रेलवे इन्फ्रास्ट्रक्चर के साथ संतुलित किया जाना चाहिए, ताकि यात्रियों की सुरक्षा और सांस्कृतिक मूल्य दोनों सुरक्षित रहें।