डोंबिवली के एक अस्पताल में डॉक्टरों और नर्सों पर हुए हमले के बाद महाराष्ट्र में चिकित्सा जगत में भारी उबाल है। शिव सेना पार्षद की गिरफ्तारी के बाद भी स्वास्थ्य संगठन कड़े सुरक्षा उपायों की मांग कर रहे हैं।

महाराष्ट्र के डोंबिवली में एक नागरिक अस्पताल में डॉक्टरों और नर्सों पर हुए कथित हमले ने पूरे राज्य में एक बड़े विवाद का रूप ले लिया है। इस घटना ने चिकित्सा जगत और राज्य सरकार के बीच एक तीखी बहस छेड़ दी है। मुख्य आरोपी, शिव सेना पार्षद रमेश म्हात्रे ने अपने तीन सहयोगियों की गिरफ्तारी के बाद ठाणे पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। हालांकि, म्हात्रे ने बाद में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का हवाला देते हुए खुद को ठाणे सिविल अस्पताल में भर्ती करा लिया।

चिकित्सा संगठनों का कड़ा रुख

इस घटना के विरोध में महाराष्ट्र स्टेट एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स (Central MARD) ने राज्य के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में डॉक्टरों द्वारा गुरुवार को काले रिबन पहनने का निर्णय लिया है। यह विरोध प्रदर्शन चिकित्सा सेवाओं को बाधित किए बिना, स्वास्थ्य कर्मियों के खिलाफ बढ़ती हिंसा के खिलाफ एकजुटता प्रदर्शित करने के लिए किया जा रहा है।

साथ ही, महाराष्ट्र नर्स एसोसिएशन ने भी इस हिंसा की निंदा की है। एसोसिएशन ने घोषणा की है कि राज्य भर में नर्सें 10 जुलाई से तीन दिवसीय 'ब्लैक रिबन' विरोध प्रदर्शन शुरू करेंगी। यदि सरकार ने इस मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो 13 जुलाई के बाद इस आंदोलन को अनिश्चितकालीन हड़ताल में बदलने की चेतावनी दी गई है।

सुरक्षा और कानून व्यवस्था पर सवाल

डॉक्टरों और नर्सों के संगठनों ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने मांग की है कि अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाए और दोषियों के खिलाफ महाराष्ट्र मेडिकेयर एक्ट तथा भारतीय न्याय संहिता के तहत सख्त कार्रवाई की जाए।

नर्स एसोसिएशन की अध्यक्ष डॉ. मनीषा शिंदे ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि लोगों में कानून का डर खत्म होता जा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि स्वास्थ्य कर्मी पहले से ही अत्यधिक कार्यभार और कर्मचारियों की कमी से जूझ रहे हैं, ऐसे में उन पर शारीरिक हमला करना उनके सम्मान और कर्तव्य के पालन पर सीधा प्रहार है।