महाराष्ट्र सरकार ने घोषणा की है कि 1 जनवरी 2011 से पहले बनी सभी पात्र झुग्गी बस्तियों को सुरक्षा दी जाएगी और निवासियों को उचित पुनर्वास प्रदान किया जाएगा।
महाराष्ट्र सरकार ने राज्य की झुग्गी बस्तियों के भविष्य को लेकर एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने विधानसभा में घोषणा की कि 1 जनवरी, 2011 से पहले सरकारी या वन भूमि पर बनी सभी पात्र झुग्गियों को सुरक्षा प्रदान की जाएगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस तिथि से पहले रहने वाले किसी भी पात्र निवासी को बेघर नहीं किया जाएगा।
पुनर्वास और सर्वेक्षण की रणनीति
मंत्री बावनकुले ने बताया कि कई बस्तियाँ विकास नियंत्रण नियमों (DCR), पर्यावरण के प्रति संवेदनशील क्षेत्रों और वन संरक्षण मानदंडों के कारण अपने वर्तमान स्थानों पर नियमित नहीं की जा सकती हैं। ऐसे मामलों में, सरकार पुनर्वास को एकमात्र व्यवहार्य विकल्प मान रही है। इस प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए, अगले तीन महीनों के भीतर मुंबई और उसके उपनगरों सहित पूरे राज्य में एक व्यापक बायोमेट्रिक और भौतिक सर्वेक्षण किया जाएगा।
उच्च स्तरीय समिति का गठन
सरकार ने मुंबई शहर, मुंबई उपनगर और कोंकण क्षेत्र में पुनर्वास की समस्याओं के समाधान के लिए कोंकण संभागा आयुक्त की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। इस क्षेत्र में मैंग्रोव, वन, राजस्व, नज़ुल और CIDCO की भूमि पर बड़ी संख्या में झुग्गियां बसी हुई हैं। इस समिति में मुंबई शहर और मुंबई उपनगर के जिला कलेक्टर भी शामिल हैं।
भविष्य की योजना और मास्टर प्लान
सर्वेक्षण पूरा होने के तीन महीने के भीतर एक व्यापक मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा। यह योजना उन निवासियों की पहचान करेगी जिन्हें उनके वर्तमान स्थान पर नहीं रखा जा सकता है, और उन्हें MHADA, CIDCO, स्लम पुनर्वास प्राधिकरण (SRA) या अन्य सरकारी आवास परियोजनाओं में स्थानांतरित किया जाएगा। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की कैबिनेट ने इस नीति को पहले ही मंजूरी दे दी है और इसका कार्यान्वयन 'युद्ध स्तर' पर शुरू कर दिया गया है।