दिल्ली के एक सत्र न्यायाधीश ने 2021 के हत्या प्रयास मामले में अभिने​श त्रिपाठी को बरी कर दिया, क्योंकि प्रमुख गवाह रश्मि की मृत्यु हो गई और प्रॉसिक्यूशन ने पर्याप्त सबूत नहीं प्रस्तुत किए। यह फैसला घरेलू हिंसा के मामलों में गवाह सुरक्षा की चुनौती को उजागर करता है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • रश्मि की मृत्यु से प्रमुख गवाह खो गया
  • प्रॉसिक्यूशन ने सबूतों से आरोप सिद्ध नहीं कर पाए
  • अभिने​श त्रिपाठी को बरी कर दिया गया

दिल्ली के प्रधान जिला और सत्र न्यायाधीश संजय शर्मा ने 6 जुलाई को एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया, जिसमें अभिने​श त्रिपाठी को बरी कर दिया गया। यह मामला 2021 में रश्मि द्वारा दायर किया गया था, जिनके पति पर उनके जीवन को खतरे में डालने का आरोप था।

मामले की पृष्ठभूमि

अप्रैल 2021 में रश्मि ने अपने पति के खिलाफ घरेलू हिंसा और हत्या के प्रयास का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज की। वह बताती थीं कि पति ने उन्हें हॉकी स्टिक से पीटा और फिर शराबी होकर तीसरी मंजिल से फेंका। इस पर आईपीसी की धारा 307 (हत्या का प्रयास), 323 (हथियार से चोट), 341 (भेदभाव) और 506 (धमकी) के तहत एफआईआर दर्ज हुई।

साक्ष्य की कमी और गवाह की मृत्यु

ट्रायल के दौरान रश्मि को सम्मन भेजा गया, पर वह किराए के मकान से हट गई और बाद में उनका निधन हो गया। उनका पिता ने अदालत को सूचित किया कि रश्मि ने सभी विवादों का निपटारा कर लिया था, आपसी सहमति से तलाक ले ली थी और उन्हें 8 लाख रुपये की अलिमोनी मिली थी। रश्मि की गवाही न मिलने के कारण प्रॉसिक्यूशन के पास केवल औपचारिक पुलिस गवाह ही बचे, जिनकी गवाही भी आरोप सिद्ध करने के लिये अपर्याप्त थी।

न्यायिक विश्लेषण

अदालत ने कहा कि “केवल प्रमुख गवाह – शिकायतकर्ता/पीड़ित रश्मि – का देहांत हो गया है और प्रॉसिक्यूशन ने कोई अन्य गवाह नहीं पेश किया जो आरोपी के किसी भी कृत्य को सिद्ध कर सके।” इस कारण, बिना ठोस सबूत के, अभियोजन ने “संदेह के परे” सिद्ध नहीं किया और इसलिए त्रिपाठी को बरी किया गया।

भविष्य के प्रभाव

यह फैसला घरेलू हिंसा के मामलों में गवाहों की सुरक्षा और साक्ष्य संग्रह की महत्ता को उजागर करता है। न्यायालयों को अब अधिक सक्रिय रूप से गवाहों की सुरक्षा, शीघ्र गवाही रिकॉर्डिंग, और वैकल्पिक साक्ष्य विधियों को अपनाने की जरूरत है, ताकि न्याय प्रक्रिया में देरी या गवाह की मृत्यु जैसे कारणों से मामलों का निपटारा न हो सके।

अभिने​श त्रिपाठी की बरी होने की खबर ने सामाजिक मीडिया पर व्यापक चर्चा को जन्म दिया है, जहाँ कई लोग न्याय व्यवस्था की कमजोरियों को लेकर सवाल उठा रहे हैं।