फ़िरोज़ाबाद के एक अदालत ने 28 वर्षीय व्यापारी जितेंद्र पाथक को 18‑महीने के शिशु की हत्या के लिए मृत्युदंड दिया। यह मामला 'रररर दुर्लभ' श्रेणी में आता है, जहाँ पीड़ित की माँ ने उसके शादी प्रस्ताव को ठुकरा दिया था। अदालत ने 40 दिनों के भीतर दोषी को फांसी की सजा सुनाई।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- फ़िरोज़ाबाद कोर्ट ने 28‑वर्षीय व्यापारी को मृत्युदंड दिया।
- हत्या का कारण माँ द्वारा शादी प्रस्ताव का अस्वीकार था।
- साक्ष्य में सोशल मीडिया पर वायरल सीसीटीवी फुटेज शामिल है।
फ़िरोज़ाबाद न्यायालय ने 10 जुलाई, 2026 को एक अत्यंत गंभीर अपराध के लिए 28‑वर्षीय व्यापारी जितेंद्र पाथक (उपनाम विराज) को मृत्युदंड सुनाया। पाथक ने 18‑महीने के शिशु को आठ बार जमीन पर धकेल कर मार दिया, जब उसकी माँ ने उसके शादी प्रस्ताव को ठुकरा दिया। यह सजा भारतीय दंड संहिता के तहत 'रररर दुर्लभ' (rarest of rare) श्रेणी में आती है, जिसका अर्थ है कि यह अत्यंत दुर्लभ और घोर अपराध है।
पृष्ठभूमि और अपराध का विवरण
पाथक, जो एक स्थानीय व्यापारी था, ने मार्च 2026 में रती शर्मा (24) की माँ के घर में अक्सर मिलने शुरू किया। रती, अपने पति के साथ चल रहे वैवाहिक विवाद के कारण अपने माता-पिता के घर में रह रही थी। पाथक ने रती को शादी का प्रस्ताव दिया, लेकिन वह अपने बेटे को नहीं छोड़ने की बात स्पष्ट कर के अस्वीकार कर दिया। इस अस्वीकृति से पाथक को गुस्सा आया और उसने शिशु को अपने स्वयं के संबंध के लिए बाधा मान लिया।
हत्या की योजना और कार्यवाही
30 मई को पाथक ने शिशु को मिठाई खरीदने के बहाने घर से बाहर ले गया और लगभग 50 मीटर दूर एक सुनसान सड़क पर ले जाकर बार‑बार उसे जमीन पर धकेल दिया। आसपास के निवासियों ने ध्वनि को सीमेंट बैग के उतारने जैसा समझा, लेकिन एक स्थानीय निवासी ने सीसीटीवी फुटेज पर देखा और तुरंत पुलिस को सूचित किया। फेंटा गया शिशु बाद में परिवार द्वारा बेहोश पाकर पाया गया।
साक्ष्य और न्यायिक प्रक्रिया
पुलिस ने छह दिनों के भीतर अभियोग पत्र दायर किया और सीसीटीवी फुटेज को मुख्य साक्ष्य के रूप में पेश किया। इस फुटेज ने सामाजिक मीडिया पर वायरल हो कर सार्वजनिक प्रतिक्रिया को तीव्र कर दिया। पाथक को 30 मई को एक आपराधिक मुठभेड़े में गिरफ्तार किया गया, जिसमें उसे दोनों पैर में गोली लगी और वह हिरासत में ले लिया गया। अदालत ने 40 दिनों के भीतर दोषी को 'रररर दुर्लभ' श्रेणी में मानते हुए मृत्युदंड दिया।
प्रतिक्रिया और भविष्य की दिशा
पीड़ित की माँ, अनसुय्या शर्मा, ने न्यायालय के फैसले का स्वागत किया और सजा के पूर्ण कार्यान्वयन की मांग की। उन्होंने कहा, “हम अब तक न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं, और हमें इस सजा के लागू होने तक लड़ाई जारी रखनी होगी।” प्रतिवादी के वकील ने उच्च न्यायालय में अपील करने का इरादा बताया। इस मामले ने भारतीय न्याय प्रणाली में ‘रररर दुर्लभ’ सजा के उपयोग पर चर्चा को भी उजागर किया।