दिल्ली के एक सुरक्षा गार्ड को आयकर विभाग की झूठी भर्ती के चक्कर में दो लाख रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ। पुलिस ने इस घोटाले में शामिल छह‑सात लोगों को लापता रकम के साथ 10 लाख रुपये तक के धोखाधड़ी के आरोप में चार आरोपी को गिरफ्तार किया।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • गार्ड को आयकर भर्ती घोटाले में 2 लाख का नुकसान
  • कुल मिलाकर 6‑7 लोग लगभग 10 लाख रुपये का शिकार
  • पुलिस ने 4 आरोपी को गिरफ्तार किया, नेटवर्क की जांच जारी

दिसंबर की ठंडी सुबह, 35‑वर्षीय सुरक्षा गार्ड गौतम प्रसाद ने दिल्ली के सिविक सेंटर, अजमेरी गेट में मुख्य द्वार की ड्यूटी संभाली थी। उसी दिन एक अजनबी ने उनसे बातचीत शुरू की, जो स्वयं को नवीन प्रकाश बताता था और आयकर विभाग में मल्टी‑टास्किंग स्टाफ (MTS) की नौकरी का प्रस्ताव दिया।

घटना का विवरण

गौतम ने बताया कि वह अपने वर्तमान काम से असंतुष्ट था और बेहतर अवसर की तलाश में था। नवीन ने बताया कि वह आयकर विभाग में काम करता है और गौतम को वही पद दिलाने में मदद करेगा। MTS पद, जो ग्रुप‑C सरकारी नौकरी है, की वेतनमान लगभग 44,000 रुपये प्रतिमाह है, जिससे यह प्रस्ताव अत्यंत आकर्षक लगा। इस भरोसे के कारण गौतम ने अपना नौकरी छोड़ दिया, भविष्य निधि (PF) तोड़ दी और फिर भी कोई आधिकारिक नौकरी का प्रस्ताव नहीं मिला।

धोखाधड़ी की प्रक्रिया

पुलिस के अनुसार, गौतम को पाँच अलग-अलग लेन‑देनों में कुल दो लाख रुपये ट्रांसफर करने को कहा गया। इसके बाद उसे सिविक सेंटर के भीतर एक ‘इंटरव्यू’ के लिए बुलाया गया, जहाँ दो पुरुष—रोहित चौहान और पवन दत्त शर्मा—ने खुद को MTS कर्मचारियों के रूप में पेश किया। उन्होंने बताया कि नौकरी का प्रस्ताव जनवरी 2026 में आएगा, फिर मार्च में बताया, परन्तु बाद में कॉल का जवाब देना बंद कर दिया गया।

पुलिस की कार्रवाई और गिरफ़्तारी

जांच में पता चला कि इस घोटाले में कम से कम छह‑सात लोग शामिल थे और कुल नुकसान लगभग दस लाख रुपये था। 3 जुलाई को रोहित (रोजगार एजेंट) को रोहिणी से गिरफ्तार किया गया; उसके साथ पवन, चिराग अग्रवाल और तरुण गोस्वामी को भी गिरफ्तार किया गया। चिराग, जो स्वयं को ‘प्रकाश’ के नाम से जाना जाता था, ने पीड़ितों को सिविक सेंटर के भीतर ले जाकर भर्ती प्रक्रिया को वैध दिखाया।

भविष्य की दिशा और सामाजिक प्रभाव

यह केस सामाजिक मीडिया पर नौकरी के विज्ञापनों के माध्यम से चलने वाले बड़े धोखाधड़ी नेटवर्क को उजागर करता है। पुलिस ने चार मोबाइल फोन, नकली सत्यापन फॉर्म और पहचान दस्तावेज़ बरामद किए। आयकर विभाग के कुछ पूर्व कर्मचारी भी इस नेटवर्क में शामिल हो सकते हैं, जिसका आगे की जांच जारी है। इस प्रकार के घोटाले न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि बेरोजगार युवाओं के रोजगार के सपनों को भी धूमिल करते हैं।