परिवारिक विवाद के बाद चार कज़िन घर से भाग गए। दो बहनें और उनका कज़िन दिल्ली के सफ़दरजंग अस्पताल के पास भीख माँगते मिले, जबकि दो अन्य बहनें महाराष्ट्र में ट्रेन में सवार होकर बेघर पाई गईं। पुलिस ने व्यापक खोज के बाद बच्चों को उनके परिवारों से मिलवाया।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- चार बच्चों को परिवारिक विवाद के कारण घर से भागना पड़ा
- दिल्ली और महाराष्ट्र में बेघर होकर पाया गया
- पुलिस ने व्यापक खोज के बाद बच्चों को परिवार से मिलवाया
दिल्ली के सफ़दरजंग अस्पताल के पास दो बहनें और उनका कज़िन, कुल मिलाकर तीन बच्चे, बेघर होकर भीख माँगते हुए पुलिस को दिखे। यह घटना तब सामने आई जब स्थानीय निवासी ने उन्हें देखा और तुरंत पुलिस को सूचित किया। जांच में पता चला कि ये बच्चे एक बड़े परिवार के सदस्य थे, जिनके बीच संपत्ति और देखभाल को लेकर गंभीर विवाद चल रहा था।
परिवारिक विवाद और भागने का कारण
शुरुआत में यह मामला एक निजी पारिवारिक झगड़ा था, जिसमें अभिभावकों के बीच संपत्ति के बंटवारे को लेकर तीखी बहस हुई। चार छोटे कज़िन, जिनकी उम्र 8 से 12 वर्ष के बीच थी, ने इस तनाव को महसूस कर अपने घर से भागने का फैसला किया। पुलिस ने तुरंत एक अपहरण (किडनैपिंग) एफआईआर दर्ज कर दी और बच्चों के विवरण को राष्ट्रीय स्तर पर प्रसारित किया।
दिल्ली में पहला मिलन
दिल्ली पुलिस ने स्थानीय निगरानी कैमरों और नागरिकों की मदद से दो बहनों और उनके कज़िन को खोजा। बच्चों को साफ़ पानी, भोजन और तत्काल चिकित्सा सहायता प्रदान की गई। उन्हें तुरंत उनके निकटतम रिश्तेदारों के पास ले जाया गया, जहाँ उन्होंने अपने परिवार के साथ भावनात्मक पुनर्मिलन किया।
महाराष्ट्र में दूसरा मिलन
जबकि दिल्ली में तीन बच्चों को पाया गया, चौथा बच्चा, यानी दो बहनें, ने ट्रेन पकड़ कर महाराष्ट्र की ओर रुख किया। महाराष्ट्र पुलिस ने रेलवे स्टेशनों पर विशेष सतर्कता रखी और अंततः उन्हें पुणे के पास एक रेलवे प्लेटफ़ॉर्म पर बेघर अवस्था में पाया। स्थानीय स्वयंसेवकों की मदद से उन्हें सुरक्षा दी गई और फिर दिल्ली में उनके परिवार को सौंपा गया।
विस्तृत खोज और भविष्य की सुरक्षा
इस केस ने बच्चों की सुरक्षा और परिवारिक विवादों के संभावित परिणामों पर राष्ट्रीय चर्चा को जन्म दिया। पुलिस ने यह भी बताया कि भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए सामाजिक सेवाओं और बच्चों की वॉच डॉग एजेंसियों को सशक्त करना आवश्यक है। इस घटना ने सामाजिक संरचनाओं में सुधार की आवश्यकता को उजागर किया, जिससे बच्चों को ऐसी स्थितियों से बचाया जा सके।