पुणे के मोशी क्षेत्र में कचरा‑ऊर्जा संयंत्र की इमारत ढहने से 23 कर्मचारियों में से 14 बचाए गए, जबकि एक की मौत हो गई। विज़य सापकल ने मलबे में फँसकर पत्नी को अंतिम संदेश और सेल्फी भेजी, 9 घंटे बाद बच निकले।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • 23 कर्मचारियों में से 14 बचाए गए, एक की मौत, बचे हुए अभी खोजे जा रहे हैं।
  • विज़य सापकल ने 9 घंटे तक मलबे में फँस कर पत्नी को अंतिम संदेश और सेल्फी भेजी।
  • सरकार ने परिजनों को कुल 15 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति की घोषणा की।

जब दोपहर के लगभग 1:30 बजे पुणे के मोशी क्षेत्र में स्थित कचरा‑ऊर्जा संयंत्र के एक भवन पर बड़े पैमाने पर कचरे का ढेर गिरा, तो विज़य सापकल सहित 23 कर्मचारी एक साथ फँस गए। इस आपदाकारी घटना ने सुरक्षा मानकों की गंभीर कमी को उजागर किया, क्योंकि ऐसे संयंत्रों में कचरे की बड़ी मात्रा और मेथेन गैस की मौजूदगी पहले से ही जोखिम का संकेत देती है।

पृष्ठभूमि और सुरक्षा‑संकट

भारत में कचरा‑ऊर्जा परियोजनाएँ तेजी से बढ़ रही हैं, लेकिन कई बार निर्माण मानकों, भौतिक निरीक्षण और आपातकालीन उपायों की अनदेखी की जाती है। पिछले वर्षों में समान संयंत्रों में छोटे‑स्तरीय ढहाव और आग की घटनाएँ रिपोर्ट हुई हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि नियामक संस्थाओं को अधिक कठोर निरीक्षण की आवश्यकता है।

विनाश के क्षण और विज़य की जीवनी

भवसागर में फँस कर, विज़य ने अपना मोबाइल निकाला और पत्नी को "मैं इमारत के नीचे फँसा हूँ... जल्दी आओ" के साथ एक सेल्फी भेजी। वह खुद को एक भारी स्तम्भ ने पैर के नीचे दबा रखा था, टूटे काँच और गैस की बदबू ने साँस लेना कठिन बना दिया था। इस बीच, वह लगातार भगवान का नाम जपता रहा और अन्य फँसे हुए कर्मचारियों को आश्वस्त किया, जिससे उनका मनोबल बना रहा।

नौ घंटे बाद का चमत्कार

सुरक्षा दलों ने भारी मशीनरी, ध्वनि‑सेंसर और विशेष बचाव टीमों की मदद से मलबे को हटाना शुरू किया। नौ घंटे की लंबी प्रतीक्षा के बाद, विज़य को सुरक्षित रूप से बाहर निकाला गया। वर्तमान में वह एक निजी अस्पताल में उपचार ले रहे हैं, जहाँ डॉक्टरों ने कहा है कि उनका बचाव “एक चमत्कार” है। उसी समय, एक महिला कर्मचारी भी बच निकाली गई, जबकि आठ अन्य अभी भी अज्ञात हैं।

सरकारी प्रतिक्रिया और भविष्य की राह

पिंपरी‑चिंचवड नगरपालिका ने मृतकों के परिवारों को 10 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति, महाराष्ट्र सरकार ने अतिरिक्त 5 लाख रुपये और परियोजना ठेकेदार ने 25 लाख रुपये की सहायता की घोषणा की। साथ ही, अधिकारियों ने कहा है कि जिम्मेदारियों की जाँच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस आपदा ने न केवल जीवन‑संकट को उजागर किया, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े सुरक्षा मानकों और नियमित निरीक्षण की जरूरत को भी रेखांकित किया।