अगरा कैंट स्टेशन पर रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (RPF) और डिप्टी स्टेशन सुपरिंटेंडेंट के बीच टकराव की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुई। घटना के बाद संबंधित RPF कर्मियों को निलंबित किया गया और तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की गई।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- अगरा कैंट पर RPF और डिप्टी स्टेशन सुपरिंटेंडेंट के बीच टकराव की वीडियो वायरल हुई
- संबंधित RPF कर्मियों को तुरंत निलंबित किया गया
- तीन सदस्यीय जांच कमेटी ने मामले की जाँच शुरू की
अगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर 12 जुलाई, 2026 को एक ट्रेन के प्रस्थान के दौरान एक अनपेक्षित टकराव हुआ, जिसमें रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (RPF) के कुछ सदस्य और डिप्टी स्टेशन सुपरिंटेंडेंट (Dy SS) शामिल थे। घटना की वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से फैल गई, जिससे जनता में गुस्सा और सवाल उठे।
घटना का विवरण
हिराकुंड एक्सप्रेस (ट्रेन नं 20808) के आगमन के बाद, ट्रेन ने स्टेशन से प्रस्थान किया, फिर अचानक दोबारा रुक गई। इस दौरान ऑपरेशन्स विभाग और RPF के बीच ट्रेन रोकने के कारण को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ। वीडियो में RPF कर्मियों को Dy SS के साथ शारीरिक झगड़ा करते दिखाया गया, जिसमें हाथ‑पैर पकड़कर खींचे जाने के दृश्य भी शामिल हैं।
रेलवे प्रशासन की प्रतिक्रिया
उत्तर मध्य रेलवे (NCR) के मुख्य जनसंचार अधिकारी डॉ. शिवम शर्मा ने कहा, “RPF और Dy SS के बीच कुछ भ्रम था, जांच चल रही है।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह टकराव महिलाओं के डिबैड़िंग से संबंधित नहीं था। तुरंत कार्रवाई के तौर पर, वीडियो में दिखाई देने वाले RPF कर्मियों को निलंबित किया गया।
जांच प्रक्रिया
रेलवे प्रशासन ने तीन सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया। इस कमेटी में असिस्टेंट ऑपरेशन्स मैनेजर (AOM), अगरा; असिस्टेंट सिक्योरिटी कमिश्नर (ASC), RPF, अगरा; और असिस्टेंट डिवीज़नल इलेक्ट्रिकल इंजीनियर (ADEE), अगरा शामिल हैं। कमेटी को मामले की पूरी जाँच करके जल्दी ही रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है, और रेलवे एक्ट के तहत आवश्यक अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
भविष्य के प्रभाव
यह घटना भारतीय रेल की सार्वजनिक छवि को क्षति पहुंचा सकती है, खासकर जब सार्वजनिक स्थानों पर अधिकारी-स्टाफ के बीच असहिष्णुता दिखती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिये स्पष्ट प्रोटोकॉल और प्रशिक्षण आवश्यक है, साथ ही तेज़ और पारदर्शी जांच प्रणाली भी आवश्यक होगी।